एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से भेंट कर जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को नौतोड़ वन भूमि की स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ भूमि आवंटन के लिए वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की बाध्यता को हटाने का आग्रह किया था। उन्होंने बताया कि नौतोड़ वन भूमि की स्वीकृति का अधिकार संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्यपाल के पास निहित है।
जगत सिंह नेगी ने आग्रह किया कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के प्रावधानों को इस संदर्भ में निरस्त किया जाए, ताकि जनजातीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के पात्र परिवारों और युवाओं को नौतोड़ भूमि का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014, 2016 और 2018 में भी इस संबंध में छूट प्रदान की गई थी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिला था।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में भूमि की उपलब्धता सीमित होने के कारण लोगों को रोजगार और बेहतर आजीविका की तलाश में पलायन करना पड़ रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तथा पलायन रोकने के लिए पात्र परिवारों को नौतोड़ भूमि का आवंटन आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नौतोड़ नीति के तहत पात्र परिवारों को 20 बीघा तक भूमि प्रदान की जा सकती है।
राज्यपाल ने इस विषय पर गंभीरता से चर्चा करते हुए मामले पर शीघ्र उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।

