एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश में सूख चुके चीड़ (पाइन) के पेड़ों की कटाई को लेकर वन विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने हिमाचल प्रदेश भू संरक्षण अधिनियम, 1978 की धारा 4 और 7 के तहत 10 सितंबर 2002 को जारी अधिसूचना में संशोधन किया है।
ताजा निर्देशों के अनुसार अब प्राकृतिक आपदा, बीमारी या कीट आक्रमण के कारण सूख चुके चीड़ के पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जा सकेगी। यह अनुमति स्वीकृत 10 वर्ष के फेलिंग प्रोग्राम (कटाई योजना) के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी जाएगी। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रावधान नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत और छावनी परिषद क्षेत्रों में लागू नहीं होगा।

निर्देशों के अनुसार यदि किसी विशेष परिस्थिति में 10 वर्षीय फेलिंग प्रोग्राम से बाहर भी सूखे चीड़ के पेड़ों को काटने की आवश्यकता पड़ती है तो संबंधित वन वृत्त के अरण्यपाल (CF) सरकार को इसकी सिफारिश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में पूरे वन वृत्त में एक वर्ष में अधिकतम 500 पेड़ों की कटाई की ही अनुमति दी जाएगी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार की कटाई से पहले मौके पर भौतिक सत्यापन अनिवार्य होगा। यह सत्यापन उप अरण्यपाल वन (DFO) स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद ही कटाई की अनुमति मिल सकेगी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन पारिस्थितिकी संरक्षण, वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह आदेश अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) कमलेश कुमार पंत की ओर से जारी किया गया है।
