धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को भू अभिधृति एवं भूमि सुधार संशोधन विधेयक 2025 पर लंबी चर्चा के बाद इसे पारित नहीं किया जा सका। सरकार और विपक्ष दोनों की सहमति से तय किया गया कि विधेयक को और परीक्षण के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाएगा। अब समिति इस विधेयक का बिंदुवार अध्ययन करेगी और अपनी राय के साथ इसे आगामी बजट सत्र में फिर से सदन में पेश किया जाएगा। सदन में विधेयक पेश करते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह संशोधन राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और निवेश को सरल बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि सहकारी सभाओं को भूमि लेने में आने वाली दिक्कतें दूर होंगी। वहीं, उद्यम लगाने की प्रक्रिया सरल होगी और व्यवसाय को नई गति मिलेगी मंत्री ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में सीमित संसाधन और रोजगार के कम अवसर बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में अगर राज्य में निवेश बढ़ाया जाए तो रोजगार और आर्थिक स्थिरता बढ़ सकती है। इसलिए इस बिल में कुछ ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो कृषि, सहकारी क्षेत्र और पर्यटन आधारित व्यापार में गति ला सकते हैं।
विपक्ष ने जताई चिंता – बाहरी लोगों को फायदा होगा
विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजप विधायक रणधीर शर्मा ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई। शर्मा ने कहा कि हिमाचल में जमीन की सुरक्षा के लिए धारा 118 लागू की गई थी, ताकि बाहरी राज्यों के लोग यहां आकर बड़े पैमाने पर जमीन न खरीद सकें और स्थानीय लोगों का अधिकार सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि अगर नियमों में ढील दी गई तो बाहरी पूंजी वाले लोग अधिक कीमत देकर जमीन खरीद सकते हैं। इससे स्थानीय लोगों के लिए भूमि खरीदना मुश्किल हो सकता है। रोजगार के नाम पर बाहरी लोगों का कब्जा बढ़ सकता है। हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार ने अनुच्छेद 118 जैसे प्रावधान हिमाचल के भविष्य के लिए बनाए थे। इसलिए इन नियमों में बदलाव सोच-समझकर और पूरी पारदर्शिता से होने चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस बिल को बिना जल्दबाजी के सेलेक्ट कमेटी के पास भेजना ही उचित है।
मुख्यमंत्री का जवाब – “यह जमीन बेचने का बिल नहीं”
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विपक्ष की चिंताओं को अस्वीकार करते हुए कहा कि संशोधन बिल को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह विधेयक जमीन बेचने से जुड़ा नहीं है और न ही यह धारा 118 को कमजोर करता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि गैर-कृषक भूमि प्राप्त करेगा तो वह सरकार के अधिकार में रहेगी। होटल या पर्यटन प्रोजेक्ट जहां से रुके हैं, वहीं से अनुमति दी जाएगी। सहकारी सभाओं को राहत देना इस बिल का मुख्य उद्देश्य है। यह संशोधन सोच-समझकर लाया गया है और इससे हिमाचल की पहचान को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास और सुरक्षा के बीच एक संतुलन बनाकर आगे बढ़ना जरूरी है। सरकार का उद्देश्य राज्य की जमीन को बेचना नहीं बल्कि राज्य के विकास के लिए उपयोग में लाना है।
सदन में शांति और सहमति के साथ हुआ निर्णय
लंबी चर्चा के बाद सदन में यह सहमति बनी कि विधेयक को जल्दबाजी में पास करने से बेहतर होगा कि इसे समीक्षा के बाद दोबारा प्रस्तुत किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि संशोधन विधेयक सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाएगा। समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। सिफारिशों के साथ इसे बजट सत्र में पेश किया जाएगा
आगे की राह
अब इस विधेयक का भविष्य सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। क्या भूमि सुधार से हिमाचल को नए निवेश और रोजगार मिलेंगे, या क्या यह स्थानीय लोगों की संपत्ति अधिकार और संस्कृति पर असर डालेगा, इस पर अंतिम निर्णय रिपोर्ट के बाद ही होगा।
