हिमाचल में 4 अक्टूबर से दूध प्रोत्साहन योजना, किसानों को 3 रुपये प्रति लीटर सब्सिडी मिलेगी

एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला 

हिमाचल प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि किसानों को प्रोत्साहित करने और राज्य में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक नई योजना की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। इसके तहत पात्र गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों को दूध की आपूर्ति करने वाले किसानों को 3 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दी जाएगी। यह राशि किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से प्रदान की जाएगी। मंत्री ने बताया कि यह दूध प्रोत्साहन योजना प्रदेशभर में 4 अक्टूबर से लॉन्च की जाएगी। योजना के तहत फिलहाल लगभग 8 हजार किसान और चार डेयरी सहकारी समितियां जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से किसानों को आर्थिक सशक्तिकरण मिलेगा और प्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।


केंद्र की मदद से चरवाहों के लिए शुरू होगी पहल योजना

चंद्र कुमार ने कहा कि गद्दी और गुज्जर जैसे चरवाहों का देश की सीमाओं की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान है। इन समुदायों के उत्थान के लिए सरकार ने “पहल योजना” तैयार की है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है। मंजूरी मिलने पर योजना से उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा।


डेयरी सोसायटियों का पंजीकरण 15 अक्तूबर तक करें पूरा

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियां बनाई जा रही हैं, वहां दूध उत्पादन और संग्रहण की निरंतरता सुनिश्चित होनी चाहिए। यदि कोई पंचायत सोसायटी स्थापित नहीं करना चाहती है, तो उसे सभी पंचायत सदस्यों की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित करना होगा। साथ ही, सभी सोसायटियों का पंजीकरण 15 अक्टूबर तक पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। देरी पर अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। चंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि पशुपालन विभाग का स्टाफ फील्ड में सक्रिय रहकर किसानों को सेवाएं प्रदान करे। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए पशुओं को अस्पताल तक ले जाना कठिन होता है, इसलिए चिकित्सकों को गांव-गांव जाकर मदद करनी होगी। वर्तमान में प्रदेश में 44 मोबाइल वेटरनेरी यूनिट सक्रिय हैं, जिनसे पशुपालकों को राहत मिल रही है।


मुर्गी पालन में 52% वृद्धि, पूरे प्रदेश में विकसित होगा मॉडल

पशुपालन मंत्री ने बताया कि ब्रायलर पोल्ट्री फार्मिंग हिमाचल में तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में मुर्गी पालन में 52% की वृद्धि दर्ज की गई है। पंजाब सीमा से लगे जिलों में यह व्यवसाय सफल हो चुका है और अब इसी मॉडल को पूरे प्रदेश में विकसित करने की योजना है।

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