एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सभी जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों को ‘अपना विद्यालय–हिमाचल स्कूल एडॉप्शन कार्यक्रम’ के तहत सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार सायं सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ आयोजित वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और शैक्षणिक वातावरण में सुधार लाना है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में इस कार्यक्रम के अंतर्गत गोद लिए गए सभी स्कूलों की सूची 5 जनवरी, 2026 तक सरकार को प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिला में उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त एवं वरिष्ठ अधिकारी कम से कम चार-चार स्कूल गोद लेंगे तथा प्रतिमाह इन स्कूलों में विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को गोद लिए गए स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिकारी महीने में कम से कम एक बार विद्यालयों का दौरा करें और विद्यार्थियों को करियर मार्गदर्शन व प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित जानकारी दें। स्कूल पैट्रन के रूप में अधिकारी शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समितियों के साथ मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने बताया कि अब तक इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश भर में कुल 4,231 स्कूलों को गोद लिया जा चुका है, जिनमें 1,950 प्राथमिक, 59 माध्यमिक, 664 उच्चतर तथा 1,558 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कमजोर वर्ग के बच्चों को उचित मार्गदर्शन देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखना है। उन्होंने अधिकारियों से स्कूलों के दौरे के दौरान विद्यार्थियों को नशे की बुराइयों से अवगत करवाने तथा उनमें राष्ट्रीय मूल्यों की भावना को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री ने चिट्टा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त किया जाएगा तथा अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा। चिट्टा कारोबार से जुड़े सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के सचिवों को उन निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, जो लगभग 80 प्रतिशत तक पूरे हो चुके हैं। इसके लिए आवश्यक धनराशि सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने वन भूमि से संबंधित स्वीकृति प्रक्रियाओं को भी प्राथमिकता देने तथा गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के चयन से संबंधित विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
