एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से वाहनों के प्रवेश शुल्क में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर फास्टैग के माध्यम से शुल्क वसूली का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब वाहनों से एक्सेल (Axle) के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। इस बदलाव से दूसरे राज्यों से आने वाले निजी वाहनों को अब 70 रुपये की जगह 130 रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा। यानी सीधे 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
छोटे और बड़े मालवाहक वाहनों पर भी बढ़ा बोझ
नई अधिसूचना के अनुसार:
छोटे मालवाहक वाहनों को 170 रुपये देने होंगे।
6 से 12 सीट वाले यात्री वाहनों को 130 रुपये।
12 से अधिक सीट वाले वाहनों को 200 रुपये।
बड़े मालवाहक वाहनों को 720 की जगह 900 रुपये।
निर्माण कार्य की मशीनरी ले जाने वाले वाहनों को 570 की जगह 800 रुपये।
व्यावसायिक वाहनों से 320 की जगह 600 रुपये।
32 सीटर मिनी बस: 180 की जगह 320 रुपये।
डबल एक्सेल बस और ट्रक: 570 रुपये।
ट्रैक्टर: 100 रुपये।
रिक्शा: 30 रुपये।
अब हिमाचल नंबर के 20 क्विंटल भार और 7500 किलो तक सामान ढोने वाले वाहनों से भी शुल्क वसूला जाएगा। पहले इन्हें छूट दी गई थी।
एक्सेल आधारित शुल्क प्रणाली
पहले प्रदेश में वाहनों के भार के आधार पर शुल्क तय होता था, लेकिन अब National Highways Authority of India (NHAI) की तर्ज पर एक्सेल के अनुसार शुल्क लिया जाएगा। फास्टैग प्रणाली लागू करने के लिए NHAI के नियमों का पालन अनिवार्य है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार, इन्हीं दरों के आधार पर त्रैमासिक और वार्षिक पास भी बनाए जाएंगे।
55 टोल बैरियरों से 185 करोड़ राजस्व का लक्ष्य
प्रदेश के 55 टोल बैरियरों की नीलामी से सरकार ने 2026-27 में 185 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में 20 करोड़ रुपये अधिक है। प्रमुख बैरियरों का रिजर्व प्राइस इस प्रकार है:
मेहतपुर-गगरेट: 36.72 करोड़
बद्दी: 48.66 करोड़
परवाणू: 22.48 करोड़
सिरमौर के चार बैरियर: 33.94 करोड़
बिलासपुर: 25.67 करोड़
नूरपुर के दो बैरियर: 17.05 करोड़
फास्टैग सुविधा से सात बैरियरों को जोड़ा गया है। बैरियर लेने वालों को अपने खर्च पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाने होंगे।
क्या होगा असर?
नई व्यवस्था से दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटकों और व्यावसायिक वाहनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। साथ ही, प्रदेश के मालवाहक वाहन मालिकों को भी अब छूट नहीं मिलेगी। सरकार का दावा है कि फास्टैग प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, जाम कम होगा और राजस्व संग्रह में सुधार होगा।
