एआरबी टाइम्स ब्यूरो, बिलासपुर
नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक जीवनशैली के कारण अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं, ऐसे में आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ, संतुलित और प्राकृतिक जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है।
राजेश धर्माणी आज जिला बिलासपुर की घुमारवीं तहसील के अंतर्गत तलवाड़ा गांव स्थित व्यास विहार में आत्रेय आयुर्वेद पीठ आयुर्वेद वेलनेस पंचकर्म रिजॉर्ट के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि औषधीय पौधे न केवल शरीर को रोगमुक्त रखने में सहायक होते हैं, बल्कि मानसिक एवं आत्मिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केरल की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में विशुद्ध आयुर्वेद आधारित आवासीय पंचकर्म केंद्रों की स्थापना से स्वास्थ्य पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है। ऐसे संस्थान रोगियों को बेहतर उपचार प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेंगे।
इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री ने “शिवालिक क्षेत्र में औषधीय पौधे” नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। यह पुस्तक संस्थान की प्रमुख आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य नैंसी बन्याल द्वारा लिखी गई है, जिसमें शिवालिक क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एवं कृषि के माध्यम से उगाए जा सकने वाले औषधीय पौधों का विस्तृत और वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह ग्रंथ शोधार्थियों, किसानों, आयुर्वेद चिकित्सकों और आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के दौरान राजेश धर्माणी ने संस्थान परिसर में तुलसी का पौधा भी रोपित किया। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली महिला मंडल तलवाड़ा को 11 हजार रुपये तथा स्कूली बच्चों को 1100 रुपये देने की घोषणा भी की।
इससे पूर्व संस्थान के संस्थापक धनी राम वर्मा ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए बताया कि आत्रेय आयुर्वेद पीठ आयुर्वेद वेलनेस पंचकर्म रिजॉर्ट की परिकल्पना विशुद्ध आयुर्वेद सिद्धांतों पर आधारित है। यहां रोगियों को 24 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में पारिवारिक वातावरण जैसी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। संस्थान में आवासीय पंचकर्म चिकित्सा, आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा शमन चिकित्सा, योग, ध्यान तथा अन्य प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से रोगियों का उपचार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि रोगियों के आवास हेतु परिसर में ऋषि-मुनियों की कुटिया की तर्ज पर विशेष मिट्टी के कुटीर निर्मित किए गए हैं, जो शांत वातावरण प्रदान करते हैं और रोगियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
कार्यक्रम में संस्थान की प्रमुख आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य नैंसी बन्याल ने भी आयुर्वेद चिकित्सा की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। महिला मंडल एवं स्कूली बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री की धर्मपत्नी सोनिका धर्माणी, पूर्व विधायक बंबर ठाकुर, ग्राम पंचायत तलवाड़ा के प्रधान धनी राम वर्मा, विभिन्न पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाओं के सदस्य, महिला एवं युवक मंडलों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
