एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में शिमला जिला में वन अधिकार अधिनियम-2006 (एफआरए) के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को एफआरए मामलों के निपटारे में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
राजस्व मंत्री ने कहा कि अधिनियम के तहत मामलों के समयबद्ध निपटारे का प्रावधान है और देरी की स्थिति में जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने अधिकारियों से कार्य में तेजी और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने एफआरए को जनकल्याणकारी कानून बताते हुए कहा कि इसका प्रभावी क्रियान्वयन सभी अधिकारियों का दायित्व है।
बैठक में उन्होंने रोहड़ू, जुब्बल, चौपाल, शिमला ग्रामीण और कुपवी के उप-मंडल अधिकारियों से एफआरए मामलों की प्रगति पर फीडबैक लिया। उन्होंने बताया कि जिला शिमला में ग्रामसभा स्तर पर अब तक कुल 262 मामले (व्यक्तिगत व सामुदायिक) प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 196 मामलों को ग्रामीण स्तरीय वन अधिकार समितियों द्वारा उप-मंडल स्तरीय समितियों को भेजा गया है। हालांकि, अब तक एक भी मामला जिला स्तरीय समिति को नहीं भेजा जाना चिंता का विषय है।
राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को मार्च 2026 तक अधिकांश मामलों का निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी बताया गया कि जिला शिमला में कुल 2,266 वन अधिकार समितियों का गठन किया गया है। इनमें चौपाल में 277, डोडरा-क्वार में 9, जुब्बल में 129, कोटखाई में 215, कुपवी में 53, कुमारसेन में 154, रामपुर में 216, रोहड़ू में 170, शिमला ग्रामीण में 473, शिमला शहरी में 19, सुन्नी में 180 तथा ठियोग में 371 समितियां शामिल हैं।
इससे पूर्व जनजातीय विकास के संयुक्त निदेशक कैलाश चौहान ने एफआरए-2006 पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वन अधिकार अधिनियम को वर्ष 2006 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और 1 जनवरी 2008 से इसे लागू किया गया। अधिनियम के तहत अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पात्र समुदाय, जो 13 दिसंबर 2005 से पहले कम से कम तीन पीढ़ियों से वन भूमि पर निवासरत हैं और अपनी आजीविका के लिए वन पर निर्भर हैं, उन्हें भूमि अधिकार प्रदान किए जाते हैं।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप सहित जिला के सभी एसडीएम, तहसीलदार, वन अधिकारी एवं अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।
