एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
जिला शिमला के रामपुर उपमंडल में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के मूल्यांकन एवं निगरानी हेतु एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उसी दिन डॉ. एस.पी. कटयाल, अध्यक्ष, राज्य खाद्य आयोग द्वारा ननखरी एवं रामपुर खंडों के विभिन्न आंगनवाड़ी केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि निरीक्षित क्षेत्रों के अधिकांश आंगनवाड़ी केन्द्र कार्यावधि के दौरान बंद पाए गए। साथ ही यह भी संज्ञान में आया कि कुछ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कथित रूप से एक राजनीतिक दल की रैलियों में संलग्न थीं। इसके कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं सहित पात्र लाभार्थियों को प्रदान की जाने वाली आवश्यक पोषण सेवाएं बाधित हुईं।
अध्यक्ष ने पात्र लाभार्थियों को खाद्यान्न एवं पोषण सहायता से वंचित किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही समाज के कमजोर वर्गों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है तथा खाद्य सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं के मूल उद्देश्यों को कमजोर करती है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक को निर्देशित किया है कि वे निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएं—
12 फरवरी 2026 को कितने आंगनवाड़ी केन्द्र बंद पाए गए?
कितनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अवकाश पर थीं?
अवकाश किस प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया था?
उक्त दिन कितने पर्यवेक्षकों ने कितने केन्द्रों का निरीक्षण किया?
आयोग ने निर्देश दिया है कि यह प्रतिवेदन 28 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना के क्रियान्वयन में कोई बाधा उत्पन्न हुई अथवा लाभार्थियों को उनके अधिकारों से वंचित तो नहीं किया गया।
राज्य खाद्य आयोग ने खाद्य सुरक्षा एवं पोषण योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा हेतु अपनी प्रतिबद्धता पुनः दोहराई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा कर्तव्य में शिथिलता सहन नहीं की जाएगी।
