एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
झाकड़ी में सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन का आठवां सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के संचालन के लिए 11 सदस्यों का अध्यक्षमंडल गठित किया गया, जिसने पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। इस दौरान 49 सदस्यीय नई कमेटी का गठन भी किया गया।
नई कमेटी में राज कुमार को अध्यक्ष, काम राज को महासचिव और तिलक को कोषाध्यक्ष चुना गया। वहीं गुरदास, शुरम लाल, जतिन, रेखा, निशा, आमिर नेगी और पवन ठाकुर को उपाध्यक्ष बनाया गया। सचिव पद पर यशवंत, पवन विष्ट, जगदीश, पवन ठाकुर, विद्या, दिलमुनि और कॉल राम को जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा पिंकू मोदी, जितेंद्र नेगी, मुकेश मेहता, रोशन लाल, जितेंद्र प्रसाद, नानक चंद, दौलत राम, कुलदीप, दीपक नेगी, आशा, ज्ञान सरनी, अमर सिंह, सुरेश, बसंती, सुमंती, उषा, कली, कमला, शिशु पाल, नंद लाल, चूड़ा राम, पवन वर्मा, राजेंद्र भंडारी, पृथ्वीराज, रोशन लाल, नोखी राम, सुरेंद्र ठाकुर, कृष्ण चंद, विपिन, दयाल सिंह, फूला सिंह, सुनीता और राजकुमारी को सदस्य चुना गया।
सम्मेलन में सीटू जिला शिमला के अध्यक्ष कुलदीप, महासचिव अमित, सीटू जिला किन्नौर के मदन नेगी, हिमाचल प्रदेश किसान सभा के जिला सचिव प्रेम, कृष्णा राणा, हरदयाल कपूर और तुला राम शर्मा सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा 412 मेगावाट वर्कर्स यूनियन से तिलक, प्रमोद और संजीव तथा 210 मेगावाट परियोजना से मंजीत, विक्रम और कुंदन ने भी भाग लिया।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए जिला सचिव नीलदत्त शर्मा ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाने के लिए मजदूर, किसान और आम जनता विरोधी नीतियां लागू की जा रही हैं। चार लेबर कोड को मजदूर विरोधी बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकार, वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा कमजोर होगी।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंध कोड 2020 के तहत हड़ताल पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं और 300 तक मजदूरों वाले प्रतिष्ठानों को बिना सरकारी अनुमति छंटनी की छूट दी गई है, जिससे स्थायी रोजगार की सुरक्षा खत्म होगी। सामाजिक सुरक्षा कोड और व्यावसायिक सुरक्षा कोड को भी मजदूर हितों के खिलाफ बताया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने मांग की कि चारों लेबर कोड को तुरंत वापस लिया जाए और पुराने श्रम कानूनों को बहाल करते हुए मजदूरों के हित में संशोधन किए जाएं। साथ ही मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया।
