एआरबी टाइम्स ब्यूरो | मंडी
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बड़ा समाहल गांव में एक 13 वर्षीय छात्र ने फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। जानकारी के अनुसार, छात्र वार्षिक परीक्षा देकर घर लौटा था और उसके परिजनों ने उसे खेलने से मना कर पढ़ाई करने के लिए कहा था। बाद में उसने कमरे में जाकर खौफनाक कदम उठा लिया। करीब एक घंटे बाद जब उसकी मां यह देखने गई कि वह पढ़ाई कर रहा या नहीं, तो वह पंखे की कुंडी से लटका हुआ था। परिवार ने तुरंत उसे फंदे से उतारकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक परिवार ने किसी भी प्रकार का शक नहीं जताया है। सभी पहलुओं पर ध्यान देते हुए जांच की जा रही है।
इस घटना ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों पर परीक्षा और पढ़ाई का अत्यधिक दबाव मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। मनोचिकित्सकों के अनुसार, किशोरावस्था में बच्चे भावनाओं और मानसिक दबाव को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर पाते। इस उम्र में माता-पिता की नाराजगी या डांट भी कभी-कभी बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि:
खुला संवाद बनाए रखें: बच्चों से उनके अनुभव और भावनाओं के बारे में नियमित बातचीत करें।
अत्यधिक दबाव न डालें: पढ़ाई, परीक्षा और खेल के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें: स्कूल और घर में बच्चों की मानसिक स्थिति पर नजर रखें। यदि बच्चे में अत्यधिक उदासी, चिंता या अकेलापन दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ की मदद लें।
सकारात्मक प्रोत्साहन दें: बच्चों को डांटने या धमकाने के बजाय प्रोत्साहित करें, उनकी उपलब्धियों को सराहें।
सहायता केंद्रों की जानकारी दें: आवश्यक होने पर हेल्पलाइन नंबर और साइकोलॉजिकल काउंसलिंग तक पहुंच बनाएं।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि समाज और परिवार को मिलकर किशोरों के लिए एक सुरक्षित और सहयोगी वातावरण तैयार करना चाहिए, ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो।
