एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। खर्चों पर नियंत्रण और सिस्टम को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार ने बोर्ड, निगम और आयोगों में नियुक्त पदाधिकारियों को दी गई ‘कैबिनेट रैंक’ सुविधा खत्म कर दी है। इसके साथ ही सरकार ने पदाधिकारियों के वेतन और भत्तों का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर तक स्थगित रखने का भी निर्णय लिया है।
राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रशासनिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए कैबिनेट रैंक की समीक्षा की गई थी। समीक्षा के बाद तय हुआ कि विभिन्न संस्थाओं में तैनात अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, डिप्टी चेयरमैन, प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकारों को अब यह सुविधा नहीं मिलेगी। सभी विभागों को आदेश दिया गया है कि इस फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए। वहीं, 30 सितंबर तक इनके वेतन और भत्तों का 20 फीसदी हिस्सा रोकने को कहा है।

सरकार के इस फैसले का सीधा असर पदाधिकारियों की आय पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, 2 लाख रुपये मासिक वेतन पाने वाले अधिकारियों को अब करीब 1.60 लाख रुपये ही मिलेंगे। सरकार के मुताबिक, यह निर्णय अनावश्यक खर्च कम करने के लिए लिया गया है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और वीआईपी कल्चर पर रोक लगेगी विपक्ष भी कैबिनेट रैंक को लेकर सवाल उठाता रहा है।
राज्य की आर्थिक स्थिति चिंताजनक
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश पर इस समय करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान और जीएसटी मुआवजा बंद होने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति और दबाव में आ गई है। ऐसे में सरकार का यह कदम आगामी बजट से पहले वित्तीय अनुशासन का संकेत माना जा रहा है।
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