एआरबी टाइम्स ब्यूरो | सोलन
हिमाचल प्रदेश के बद्दी में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली 13 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। यह हादसा न केवल एक मासूम जान के जाने का मामला है, बल्कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, अभिभावकों की जिम्मेदारी और यातायात नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
हादसा सुबह करीब 8:50 बजे बद्दी के पुराने बस अड्डे के समीप उस समय हुआ, जब 13 वर्षीय छात्रा अपने छोटे भाई को स्कूल छोड़कर स्कूटी पर घर लौट रही थी। भाई को स्कूल छोड़ने के बाद छात्रा को स्वयं भी अपने स्कूल जाना था, इससे पहले हादसे में उसकी जान चली गई। जानकारी के अनुसार, बद्दी अस्पताल की ओर जाने वाली उतराई वाले संपर्क मार्ग पर स्कूटी का संतुलन अचानक बिगड़ गया। स्कूटी तेज रफ्तार में थी। संतुलन बिगड़ने के बाद स्कूटी पहले एक निजी वाहन से टकराने से बाल-बाल बची, लेकिन आगे जाकर एक ट्राले के पिछले हिस्से से जा टकराई। टक्कर के बाद हेलमेट निकल गया और छात्रा का सिर ट्राले से टकरा गया। सिर पर गंभीर चोटों के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
छात्रा के पिता बिहार के रहने वाले हैं और बद्दी में राजमिस्त्री का काम करते हैं। यह हादसा कई अहम सवाल खड़े करता है। 13 साल की नाबालिग बच्ची लंबे समय से स्कूटी चला रही थी, लेकिन न तो परिजनों ने उसे रोका और न ही पुलिस की ओर से कभी कार्रवाई की गई। जबकि मोटर वाहन अधिनियम के तहत नाबालिगों को किसी भी प्रकार का वाहन चलाने की अनुमति नहीं है।
हालांकि, अब पुलिस का कहना है कि कानूनन नाबालिग को वाहन देना अपराध है, इसलिए इस मामले में परिजनों के खिलाफ भी नियमानुसार मामला दर्ज किया जाएगा। फिलहाल पुलिस हादसे के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
