एआरबी टाइम्स ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना अब न सिर्फ अनाथ बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण और रहने की व्यवस्था कर रही है, बल्कि अब उनकी शादी का खर्च भी उठा रही है। इस योजना के तहत चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट की शादी के लिए सरकार ₹2 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें से ₹60,000 की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) करना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके।
अब तक 227 लाभार्थी, शिमला में 5 को मिली सहायता
वित्तीय वर्ष 2025-26 में शिमला जिले में अब तक 5 लाभार्थियों को शादी के लिए सहायता दी जा चुकी है, जबकि पूरे हिमाचल प्रदेश में 227 बच्चों को इस योजना का लाभ मिला है।
विभूति मस्ताना, कोठी गांव, जुब्बल
विभूति मस्ताना, जिनके माता-पिता का कुछ समय पहले देहांत हो चुका था, को योजना के तहत प्रतिमाह ₹4,000 की सहायता मिल रही थी। विवाह के लिए उन्होंने आवेदन किया और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें ₹2 लाख की सहायता मिली। विभूति ने कहा कि बिना माता-पिता के जीवन कठिन होता है, लेकिन सरकार की इस योजना से उन्हें बहुत राहत मिली है। ₹60,000 की एफडी उनके लिए भविष्य की सुरक्षा है।
पूजा ठाकुर, शिमला ग्रामीण
पूजा ठाकुर के माता-पिता का देहांत बचपन में हो गया था। उन्हें और उनके भाई को उनकी चाची ने पाला। जब सरकार ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना शुरू की, तो उन्होंने आवेदन किया और ₹4,000 की मासिक सहायता प्राप्त होने लगी। 12वीं तक की पढ़ाई के बाद जब उनका विवाह तय हुआ, तो सरकार से ₹2 लाख की सहायता मिली। पूजा ने कहा कि यह राशि उनके लिए बहुत बड़ी राहत थी और बिना कर्ज के शादी संभव हो सकी।
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना क्या है?
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की शुरुआत 2023 में हिमाचल के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने की थी। इसका उद्देश्य अनाथ, अर्ध-अनाथ, विशेष रूप से सक्षम बच्चे, निराश्रित महिलाएं और वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी संरक्षण देना है।
योजना के मुख्य लाभ:
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14 वर्ष की उम्र तक ₹1,000 प्रति माह
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18 वर्ष तक ₹2,500 प्रति माह
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27 वर्ष की उम्र तक ₹4,000 पॉकेट मनी
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उच्च शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा
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पीजी सुविधा न होने पर ₹3,000 मासिक सहायता
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पढ़ाई, स्टार्टअप, घर और शादी के लिए वित्तीय मदद
उपायुक्त अनुपम कश्यप का बयान
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि यह योजना उन बच्चों के लिए है जिनके माता-पिता नहीं हैं। अब उनका पालन-पोषण, शिक्षा, शादी और जीवनयापन का जिम्मा सरकार ने उठाया है। जिला शिमला में अब तक 5 बच्चों को विवाह सहायता दी जा चुकी है।
