एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की देव संस्कृति का अपना एक अलग और विशिष्ट रंग है, जो विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलता। वे आज जुब्बल उपमंडल के खनाशनी क्षेत्र के अंतर्गत गिलटाड़ी गांव में देवता गुडारू की नव निर्मित पालकी की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने देवता के मंदिर में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने स्थानीय लोगों को इस पावन आयोजन के लिए बधाई दी।
रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से जाना जाता है और यहां मनाए जाने वाले मेले व त्योहार हमारी जीवंत देव संस्कृति की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित रखना हम सबका दायित्व है।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमें प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश देती है। आज के वैज्ञानिक युग में जहां हमें वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ना है, वहीं अपनी मूल और पुरातन संस्कृति से जुड़े रहना भी उतना ही जरूरी है।
शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 2022 में किया गया था और लगभग छह माह पूर्व निर्मित पालकी की प्राण प्रतिष्ठा आज पूरे वैदिक विधि-विधान एवं मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में गिलटाड़ी गांव के लिए संपर्क मार्ग का निर्माण भी करवाया गया है, जिससे क्षेत्रवासियों को बेहतर सुविधा मिली है।
गौरतलब है कि गुडारू देवता महासू देवताओं में एक प्रमुख देवता हैं। गिलटाड़ी के साथ-साथ झालटा और क्वालटा गांवों में भी इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर उत्तराखंड स्थित महासू देवताओं के मूल स्थान हनोल से बोठा महासू, वाशिक महासू, पवासी महासू और चालदा महासू के प्रतीक स्वरूप डोरियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
इस पावन अवसर पर निदेशक हिमफेड भीम सिंह झौटा, पूर्व जिला परिषद सदस्य मोतीलाल सिथता, देवता कमेटी के सदस्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
