एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
Himachal Panchayat Elections : हिमाचल प्रदेश में चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले लोग अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह जानकारी बुधवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने दी। इस संबंध में प्रस्ताव 19 जनवरी को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में लाया जाएगा। प्रस्ताव के मंजूर होने के बाद पंचायत चुनावों में नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की एंट्री पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। चिट्टा तस्करी के जरिए बनाई गई अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर ध्वस्त किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऐसी संपत्तियों पर बुलडोजर भी चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। मंत्री ने बताया कि 21 और 22 जनवरी को प्रदेश की पंचायतों में विशेष एंटी-चिट्टा ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन सभाओं में नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा की जाएगी और लोगों को चिट्टा तस्करी के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। नशे से जुड़े मामलों की सूचना देने वालों को इनाम भी दिया जाएगा, ताकि लोग बिना भय के आगे आ सकें।
पड़ोसी राज्यों की सीमा से लगती 264 पंचायतें चिट्टे से ज्यादा प्रभावित
अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि पड़ोसी राज्यों की सीमा से लगती करीब 264 पंचायतें चिट्टा समस्या से अधिक प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए पंचायत स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जो ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर तक होंगी। प्रदेश कठिन वित्तीय दौर से गुजर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री बेहतर वित्तीय प्रबंधन कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि मंत्रियों को अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए।
अधिकारियों पर बयान को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
इस दौरान मंत्री ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के मजबूत स्तंभ हैं और लीगल कार्य करने से कोई अधिकारी मना नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को उनके राज्य से जोड़कर देखना सही नहीं है। प्रदेश के कई अधिकारी अन्य राज्यों में भी सेवाएं दे रहे हैं। अधिकारियों से काम करवाने आने चाहिए। इस तरह अधिकारियों के खिलाफ बयान देने से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। प्रदेश में ज्यादातर अधिकारी बाहरी राज्यों से ही हैं और उन्हें ऐसा नहीं लगता कि कोई अधिकारी किसी तरह की परेशानी कर रहा है।
