एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों और पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और विकास कार्यों में किसी तरह का व्यवधान न आए, इसके लिए सरकार ने प्रशासकों की नियुक्ति की है
आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने प्रदेश के 47 नगर निकायों में वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अधिकारी और सचिव को प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं। ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से जनहित में की गई हैं। सरकार ने सभी संबंधित जिला उपायुक्तों, उपमंडल अधिकारियों (नागरिक) और नगर निकाय अधिकारियों को आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह व्यवस्था हिमाचल प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1994 की धारा 268(1) के तहत की गई है। आदेशों के तहत संबंधित नगर निकायों के सुचारू संचालन के लिए उपमंडल अधिकारियों (एसडीएम) को एक लाख से पांच लाख रुपये तक के विकास कार्यों को स्वीकृति देने के प्रशासनिक अधिकार प्रदान किए गए हैं।
यह प्रशासनिक व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक सरकार द्वारा आगे कोई आदेश जारी नहीं किए जाते या नगर निकायों में नई निर्वाचित संस्थाएं गठित नहीं हो जातीं।
इन नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त
जिन नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं, उनमें बिलासपुर, श्रीनयना देवी, घुमारवीं, तलाई, चंबा, डलहौजी, चुवाड़ी, सुजानपुर टिहरा, नादौन, भोटा, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, नेरचौक, रिवालसर, करसोग, रोहड़ू, रामपुर, ठियोग, सुन्नी, नारकंडा, चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, नाहन, पांवटा साहिब, राजगढ़, नालागढ़, परवाणु, अर्की, संतोसगढ़, मैहतपुर-बसदेहरा, दौलतपुर-चौक, गगरेट और टाहलीवाल शामिल हैं।
