एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश संयुक्त अध्यापक फेडरेशन जिला शिमला की महत्त्वपूर्ण बैठक का आयोजन राजकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय छोटा शिमला में हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला शिमला के अध्यक्ष देवेंद्र लक्टू की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश संयुक्त अध्यापक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष अजय नेगी, प्रदेश संरक्षक तरूण नेष्टा एवं राज्य महिला प्रकोष्ठ अध्यक्षा दया दत्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंच एवं अन्य गतिविधियों का संचालन जिला महासचिव आकाशदीप ने किया।
बैठक में प्रदेश में सीबीएसई स्कूलों के संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना एवं राजपत्र पर गहन विचार-विमर्श किया गया । सभी उपस्थित शिक्षकों ने सीबीएसई स्कूलों में सरकार द्वारा शिक्षकों का अलग कैडर बनाए जाने पर चिंता एवं असुरक्षा की भावना व्यक्त की । उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा दो बोर्ड एवं शिक्षकों के दो कैडर बनाने से उनका मनोबल गिरेगा और इसका प्रभाव छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा ।
इसके अलावा यह मुद्दा भी छाया रहा कि अब प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में 30-35 वर्षों से छात्रों को पढ़ा रहे शिक्षकों की सीबीएसई स्कूलों में परीक्षा द्वारा नियुक्ति की जाएगी, जोकि उनके लंबे अनुभव एवं नियुक्ति पर प्रश्न चिन्ह लगाता है । उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने प्रदेश के हज़ारों छात्रों को उच्च पदों पर पहुंचाया है, उन्हें अपनी योग्यता साबित करने के लिए बाध्य करना सरासर अन्याय है। इससे शिक्षकों ने अपनी वरिष्ठता समाप्त होने एवं अन्य लाभों के न मिलने पर भी चिंता जताई । मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद भी राजपत्र में शिक्षकों की वरिष्ठता संरक्षण से संबंधित बिंदुओं को न हटाए जाने पर असंतोष व्यक्त किया गया ।
इसके अतिरिक्त सीबीएसई स्कूलों में 22 मार्च, 2026 को शिक्षकों के लिए आयोजित परीक्षा तिथि पर भी कड़ी प्रतिक्रिया की गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में 5 मार्च से 29 मार्च तक बोर्ड परीक्षाएं होनी सुनिश्चित है ।
प्रदेश में हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग एवं हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन जैसी बड़ी परीक्षा एजेंसियां मौजूद हैं , जिनके माध्यम से शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं । परन्तु आज हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा शिक्षकों की परीक्षा लेने पर प्रदेश की परीक्षा एजेंसियों द्वारा ली गई परीक्षा की विश्वसनीयता एवं उपयुक्तता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। शिक्षकों की चयन प्रक्रिया में विद्यालय विकल्प, पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।
अंत में जेबीटी, सीएंडवी, टीजीटी, प्रवक्ता, मुख्य अध्यापक एवं प्रधानाचार्य वर्ग के प्रतिनिधियों ने एकमत से सरकार द्वारा शिक्षकों के विरुद्ध पारित प्रस्तावों का विरोध दर्ज़ करते हुए संयुक्त रूप से आगे की रणनीति बनाते हुए शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया।
इस बैठक में सुरेंद्र कंवर, सुनील रणाइक, मनोज चंदेल, अजीत सिंह, डॉ. सत्य प्रकाश, संजीव शर्मा, विनोद नेगी, अमर देष्टा, सुदर्शन शर्मा एवं महिला वर्ग में हेमंती पुणो, संगीता बशटा, पूनम मान्टा,आशा नेगी, ममता टेगटा, कमलेश, सीमा मेहता, संधीरा शर्मा, नीता सूरी सहित जिला शिमला के चौपाल, नेरवा, रोहडू, जुब्बल, कोटखाई, कुमारसैन, शिमला शहरी, शिमला ग्रामीण और कसुम्पटी सहित समस्त खंडों के शिक्षकों ने भाग लिया ।
