एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
शिमला में चिट्टा तस्करी के एक पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला दिया। अदालत ने दोनों दोषियों पर 25,000 जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
वर्ष 2020 में जुब्बड़हट्टी में पकड़ा था 27.64 ग्राम चिट्टा
यह मामला वर्ष 2020 का है। 5 दिसंबर 2020 की रात करीब 12:05 बजे जुब्बड़हट्टी मार्ग पर मजठाई रेन शेल्टर के पास पुलिस ने एक संदिग्ध कार को रोका। वाहन में सवार हितेंद्र सिंह और विशाल निवासी अर्की सोलन की तलाशी लेने पर ड्राइवर सीट के नीचे एक काले कपड़े का पाउच बरामद हुआ। इसमें 27.64 ग्राम चिट्टा (डायएसिटाइल मॉर्फिन/हेरोइन), एक प्लास्टिक पाउच, अधजले नोट और एक स्टील का चम्मच मिला। पुलिस ने मौके पर ही नशीले पदार्थ और अन्य सामान को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
अभियान पक्ष ने पेश किए 14 गवाह
फोरेंसिक रिपोर्ट में बरामद पदार्थ को हेरोइन (डायएसिटाइल मॉर्फिन) होने की पुष्टि हुई। अदालत ने दोनों आरोपियों को NDPS एक्ट की धारा 21 (नशीले पदार्थ का कब्जा/परिवहन) और धारा 29 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी करार दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाह पेश किए, जिनमें स्पॉट विटनेस, स्वतंत्र गवाह और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल थे।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रचलन युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा है और समाज पर इसका व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, अदालत ने आनुपातिकता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम से अधिक सजा नहीं दी, लेकिन नशे के खिलाफ सख्ती की आवश्यकता पर जोर दिया।
