एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्री-प्राइमरी स्कूलों और डे-केयर केंद्रों के संचालन को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से राजपत्र में अधिसूचित बाल्यावस्था देख-रेख और शिक्षा केंद्र (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) नियम 2026 के तहत अब बिना पंजीकरण कोई भी केंद्र संचालित नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई नया केंद्र सभी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो उसे 6 महीने के लिए अस्थायी पंजीकरण दिया जाएगा। इस अवधि में सभी मानक पूरे करना अनिवार्य होगा, अन्यथा पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
ऑनलाइन आवेदन और फीस तय
नए नियमों के अनुसार सभी प्री-प्राइमरी स्कूलों को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के लिए कुल 15,000 रुपये शुल्क तय किया गया है, जिसमें 5,000 रुपये प्रोसेसिंग फीस और 10,000 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस शामिल है। आवेदन खारिज होने की स्थिति में 10,000 रुपये वापस किए जाएंगे। हर केंद्र में एक माह के भीतर अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन करना होगा, जिसमें 50% अभिभावक और 50% शिक्षक शामिल होंगे। बच्चों के विकास और सुरक्षा की समीक्षा के लिए हर तीन माह में बैठक अनिवार्य।
तीन स्तरों पर होगी जांच
पंजीकरण प्रक्रिया को तीन स्तरों में विभाजित किया गया है:
- जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा प्रारंभिक जांच
- निरीक्षण समिति द्वारा स्थल निरीक्षण
- निदेशालय स्तर पर अंतिम स्वीकृति
सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
🏫 इंफ्रास्ट्रक्चर के सख्त मानक
नियमों के तहत केंद्रों के लिए आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य की गई हैं:
- 20 बच्चों के लिए कम से कम 28 वर्गमीटर कक्षा
- खेल क्षेत्र, शौचालय, रसोई और विश्राम कक्ष
- सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार किट और सुरक्षित पेयजल
- दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप और बाधा मुक्त प्रवेश
📊 बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग जरूरी
प्रत्येक बच्चे का मासिक वजन और ऊंचाई रिकॉर्ड रखना होगा और यह डेटा आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ साझा किया जाएगा। 3-6 वर्ष के बच्चों का शैक्षणिक रिकॉर्ड और आधार विवरण भी अनिवार्य होगा। यदि कोई केंद्र नियमों का उल्लंघन करता है, तो उपायुक्त या निदेशक स्तर पर जांच होगी। नोटिस और सुनवाई के बाद पंजीकरण रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
