एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में शनिवार को छात्रसंघ चुनाव की बहाली और अन्य मांगों को लेकर स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने जोरदार आंदोलन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने कार्यकारी परिषद (ईसी) के सदस्यों को ज्ञापन सौंपा और शिमला शहरी विधायक हरीश जनारथा का घेराव किया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज किया, जिसमें तीन छात्र घायल हो गए। एसएफआई एचपीयू इकाई के सह सचिव आशीष ने कहा कि 2013 से विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बंद हैं। इसके चलते छात्रों का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव जल्द बहाल किए जाएं, ताकि छात्र अपनी समस्याएं मजबूती से प्रशासन
के सामने रख सकें।
विवि में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने की मांग
एसएफआई शिमला जिला अध्यक्ष विवेक नेहरा ने बताया कि 2019 में संविधान संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया था। लेकिन विश्वविद्यालय ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन बताया और आरक्षण लागू करने की मांग उठाई।
छात्रावासों की कमी और गैर शिक्षकों की भर्ती का मामला उठाया
संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय में करीब 4000 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, लेकिन केवल 1200 को ही हॉस्टल सुविधा मिल पाती है। एसएफआई ने नए छात्रावास बनाने की मांग की। एसएफआई ने आरोप लगाया कि 2019 और 2021 में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ था, लेकिन प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हुई। आरटीआई से सामने आया कि इस दौरान छात्रों से लगभग 4.50 करोड़ लिए गए।
70 प्रतिशत शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती, जांच हो
विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष योगराज ने दावा किया कि लगभग 70% शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती हुए हैं। उन्होंने न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। एसएफआई ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को शिक्षा का निजीकरण और भगवाकरण करार देते हुए विरोध जताया। संगठन का कहना है कि प्रगतिशील लेखकों की किताबें हटाई जा रही हैं और शिक्षा को बाजार की वस्तु बनाया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
