एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
HRTC Financial Crisis पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने साफ कहा कि निगम को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए सरकार को सख्त और व्यावहारिक फैसले लेने होंगे। अदालत ने संकेत दिया कि मुफ्त और रियायती यात्रा सुविधाएं निगम पर भारी बोझ बन चुकी हैं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह उन 28 श्रेणियों की विस्तृत सूची पेश करे, जिन्हें वर्तमान में यह सुविधा दी जा रही है। साथ ही, इन श्रेणियों की समीक्षा कर आवश्यक कटौती करने पर जोर दिया गया है।
निजी बस ऑपरेटर फायदे में तो एचआरटीसी घाटे में क्यों
हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब निजी ऑपरेटर कम लागत में लाभ कमा रहे हैं, तो HRTC घाटे में क्यों है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यह जांचा जाए कि निजी ऑपरेटर केवल लाभकारी रूटों पर ही सेवाएं तो नहीं दे रहे। वर्तमान में करीब 1,750 बस सेवाएं ऐसी हैं जो डीजल और रखरखाव का खर्च भी नहीं निकाल पा रही हैं। साफ है कि निगम के पास सीमित लाभकारी रूट बचे हैं।मुख्य सचिव के हलफनामे के अनुसार एचआरटीसी की मासिक आय लगभग ₹70 करोड़ है जबकि महीने का खर्चा 145 करोड़। यानी हर महीने भारी घाटा हो रहा है।
एचआरटीसी पर 1,396 करोड़ की देनदारी
HRTC पर कुल ₹1,396 करोड़ की देनदारी है। इनमें ₹1,130.24 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया है। राज्य सरकार हर महीने लगभग ₹60 करोड़ की सहायता दे रही है, लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।
