एआरबी टाइम्स ब्यूरो
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव समिति की बैठक अटल सदन में विधायक एवं समिति अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में विभिन्न क्षेत्रीय नेताओं व अधिकारियों की उपस्थिति रही।
अध्यक्ष ने कहा कि कुल्लू दशहरा केवल सांस्कृतिक पर्व नहीं बल्कि देवी-देवताओं का उत्सव है, जिसमें पूरे ज़िले से देवता पधारते हैं। देवताओं और उनके साथ आने वाले बजंतरियों, गुरों और कारदारों के लिए समुचित ठहरने, भोजन और सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। इस बार उत्सव को आपदा प्रभावितों के नाम समर्पित किया गया है और खर्चों में कटौती से जो बचत होगी, वह राहत और पुनर्वास कार्यों में लगाई जाएगी।
विदेशी दल नहीं होंगे आमंत्रित:
प्रदेश में आई भीषण प्राकृतिक आपदा को देखते हुए इस बार विदेशी सांस्कृतिक दलों को आमंत्रित नहीं किया गया है। इसके बजाय, स्थानीय और प्रदेश स्तरीय लोक कलाकारों को मौका दिया जाएगा। इस बार केवल एक सांस्कृतिक मंच लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र पर सभी संध्याएं आयोजित होंगी। कुल्लू कार्निवाल में इस बार स्थानीय संस्कृति के साथ आपदा प्रबंधन पर आधारित झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। कल्चरल परेड का आयोजन नहीं होगा।
लोक कलाकारों का सहयोग:
कई लोक कलाकार इस बार बिना शुल्क या न्यूनतम मेहनताने पर अपनी प्रस्तुति देंगे, जो समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण है।
सुरक्षा और व्यवस्था:
उत्सव के दौरान 1500 पुलिस जवान तैनात रहेंगे।
भूतनाथ पुल को छोटे वाहनों के लिए खोला जाएगा।
शटल बस सेवा और निर्धारित पार्किंग दरें लागू रहेंगी।
आमजन से वाहन कम प्रयोग करने की अपील की गई है।
समाज और संस्कृति का संगम:
यह उत्सव देव संस्कृति, परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा।