एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सोलन जिले के मनलोग-बड़ोग गांव को हनुमान बड़ोग पंचायत से अलग कर दाड़लाघाट पंचायत में शामिल किया गया था। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पंचायतों के चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर पुनर्गठन में की जा रही जल्दबाजी पर सवाल उठाए।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकारी अधिसूचना को “मनमाना और तर्कहीन” करार दिया। अदालत ने कहा कि पंचायतों के पुनर्गठन में भौगोलिक स्थिति और जनता की सुविधा सबसे अहम होनी चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि मनलोग-बड़ोग गांव को हनुमान बड़ोग पंचायत में पुनः शामिल किया जाए। साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया कि पांच दिनों के भीतर नई परिसीमन अधिसूचना जारी की जाए और दाड़लाघाट व हनुमान बड़ोग पंचायतों के वार्ड निर्धारण पुराने स्वरूप के अनुसार किए जाएं।
याचिकाकर्ताओं ने कहा- छह से सात किमी दूर पड़ेगा दाड़लाघाट
सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने कहा कि हनुमान बड़ोग पंचायत घर उनके गांव से केवल 2-3 किलोमीटर दूर है, जबकि दाड़लाघाट पंचायत 6-7 किलोमीटर दूर है। राज्य सरकार ने दावा किया कि सड़क मार्ग से हनुमान बड़ोग 14 किलोमीटर दूर है, जबकि दाड़लाघाट नजदीक है। जांच में यह सामने आया कि सरकार ने दूरी लंबे घुमावदार रास्ते से मापी थी। अदालत ने इसे अनुचित ठहराया और कहा कि ऐसा करना वैसा ही है जैसे शिमला से सोलन की दूरी बिलासपुर होकर मापना।
अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि दाड़लाघाट पंचायत की आबादी लगभग 4500 है, जबकि हनुमान बड़ोग की केवल 1500। कम आबादी वाली पंचायत से गांव निकालकर बड़ी आबादी वाली पंचायत में शामिल करना प्रशासनिक दृष्टि से भी गलत है। कोर्ट ने कहा कि पंचायतों के पुनर्गठन में केवल दूरी के आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना सही नहीं है।
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