एआरबी टाइम्स ब्यूरो
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गेहूं, मक्का और हल्दी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने यह ऐतिहासिक निर्णय जिला बिलासपुर के औहर में आयोजित किसान गोष्ठी में बताया। प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं पर 60 रुपये, मक्का पर 40 रुपये और कच्ची हल्दी पर 90 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है।
राजेश धर्माणी ने कहा कि यह कदम हिमाचल प्रदेश को देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाला अग्रणी राज्य बनाता है। उन्होंने साथ ही गाय और भैंस के दूध के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य क्रमशः 51 रुपये और 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित करने की घोषणा की। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दुग्ध सहकारी सभाएं और कृषि सहकारी संस्थाएं गठित की जा रही हैं, जो किसानों और पशुपालकों को बेहतर विपणन एवं आर्थिक लाभ पहुंचाने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मछुआरों द्वारा दी जाने वाली राॅयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर आधा करने का निर्णय लिया है तथा भविष्य में इसे पूरी तरह खत्म करने के भी प्रदेश सरकार द्वारा प्रयास किये जाएंगे। साथ ही कहा कि मछली पर भी न्यूतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार विचार कर रही है ताकि मछुआरों की आर्थिकी को भी सुदृढ़ किया जा सके। साथ ही, उन्होंने कृषि, बागवानी, पशुपालन, रेशम और मत्स्य विभागों को समन्वित कार्यवाही का आह्वान किया।
उन्होंने रासायनिक खेती से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कैंसर पर चिंता व्यक्त करते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने की जरूरत पर बल दिया। युवाओं से कृषि में शामिल होने और आईटीआई स्तर पर नई पाठ्यक्रमों में भाग लेने की अपील की। औहर में 53 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन विकास केंद्र की भी घोषणा की, जो किसानों, बागवानों और पशुपालकों को अपने उत्पाद बेचने का बेहतर प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा। इसके अलावा दूसरी तरफ भी लगभग 98 करोड़ रूपये की लागत से इसी केंद्र का दूसरा चरण विकसित किया जाएगा। इस केंद्र के स्थापित हो जाने से न केवल आने जाने वाले पर्यटकों को लाभ मिलेगा बल्कि किसानों, बागवानों, पशु एवं मत्स्य पालकों को भी अपने उत्पाद बेचने की बेहतरीन सुविधा सुनिश्चित होगी। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती के प्रगतिशील किसान ब्रहम दास, विचित्र सिंह तथा परवीन ने भी अपने अनुभव साझा किये तथा दूसरे किसानों को भी प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
इस मौके पर आत्मा परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. रितेश गुप्ता, किसान प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
