एआरबी टाइम्स ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन 2025 का शुभारंभ किया। इस दो दिवसीय सम्मेलन को उन्होंने “सहकारिता के पुनर्जागरण का उत्सव” करार दिया।उन्होंने कहा कि हिमाचल में सहकारिता अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है।
सहकारिता का इतिहास और भविष्य
उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल को सहकारिता का जनक कहा जा सकता है। 1892 में पंजावर, जिला ऊना में गठित सहकारी समिति का पंजीकरण 1906 में हुआ था। उन्होंने सहकारिता के जनक मियां हीरा सिंह को श्रद्धांजलि दी और उनके नाम पर सहकारी संस्थान की स्थापना की घोषणा की।
वर्तमान स्थिति और आर्थिक योगदान
-
हिमाचल प्रदेश में 5544 सहकारी समितियां सक्रिय हैं।
-
इनमें से 2287 कृषि सहकारी समितियां और 10 सहकारी बैंक काम कर रहे हैं।
-
सहकारी बैंकों में लोगों की कुल जमा राशि 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
-
को-ऑपरेटिव बैंक और कांगड़ा बैंक क्रमशः 6 और 5 जिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हर हिमाचली नागरिक का खाता प्रदेश के सहकारी बैंक में होना चाहिए और सरकार इसकी जिम्मेदारी लेगी।
महिला सशक्तिकरण में सहकारिता की भूमिका
ऊना जिले में स्वां वुमेन फेडरेशन नामक समिति की शुरुआत 5000 महिलाओं ने की, जो अब 25 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच चुकी है। यह हिमाचल में महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है।
तकनीकी नवाचार और डिजिटल सहकारिता
सम्मेलन में Fintech और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारी संस्थाएं डिजिटल पेमेंट, साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी को तेजी से अपना रही हैं।
सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय उत्पाद
उन्होंने कुल्लू की शॉल और टोपी की अंतर्राष्ट्रीय पहचान की सराहना की और हिमकैप कोऑपरेटिव के तहत हिमकैप इंस्टिट्यूट की उपलब्धियों को साझा किया।
सम्मेलन में शामिल प्रमुख हस्तियां
इस अवसर पर अनेक राष्ट्रीय सहकारी नेताओं ने भाग लिया, जिनमें शामिल थे:
-
इफको अध्यक्ष दिलीप संघानी
-
एनएआरसीबी के अध्यक्ष कोंडुरु रविंदर राव
-
एचपीएससीबी अध्यक्ष देवेंद्र श्याम
-
हिमफैड अध्यक्ष महेश्वर सिंह चौहान
-
एआरडीबी अध्यक्ष संजय चौहान
