एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
रामपुर बुशहर में फाग मेला 2026 आज से शाही महल परिसर में शुरू हो रहा है। मेले के लिए कुल 21 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। पहले दिन दोपहर में महल परिसर में देवताओं का आगमन होगा। नगर परिषद की ओर से प्रवेश द्वार पर स्वागत किया जाएगा। इसके बाद देवी-देवता बारी-बारी से राजगद्दी को आशीर्वाद देंगे। शाही परिवार की ओर से भी महल के मुख्य द्वार पर स्वागत होगा। शाम तक देवता अपने रात्रि ठहराव स्थलों की ओर रवाना होंगे। अगले दिन सुबह वे बाजार की ओर प्रस्थान करेंगे और पूरे बाजार का परिक्रमा करने के बाद एनएच मार्ग से महल परिसर लौटेंगे। इसके बाद देर शाम तक पारंपरिक नाटी चलेगी। इसमें स्थानीय लोग भी शामिल होंगे। चार दिन तक राज दरबार और शहर में प्राचीन वाद्ययंत्रों की मधुर धुनें सुनाई देंगी।
शाही परिवार के साथ होली की परंपरा
बुशहर क्षेत्र के आराध्य देवता बसाहरू, गसो और जाख देवता बुधवार शाम को शाही महल पहुंच गए थे। हर साल यह परंपरा है कि तीनों देवता महल पहुंचते हैं और शाही परिवार के साथ होली खेलते हैं। राजपरिवार ने देवताओं का स्वागत किया, गुलाल उड़ाया और आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर राजमाता एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, उनके पुत्र एवं मंत्री विक्रमादित्य सिंह और उनकी पत्नी डॉ. अमरीन कौर भी उपस्थित रहे।
फाग मेला: सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
फाग मेला हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर बुशहर क्षेत्र का प्राचीन उत्सव है, जो होली के अवसर पर मनाया जाता है। ‘फाग’ शब्द फाल्गुन मास और रंगों के त्योहार से जुड़ा है। यह मेला केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि देव संस्कृति, लोक नृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों का संगम है। मेले की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है और इसका संबंध बुशहर रियासत के राजवंश से है। पहले यह आयोजन केवल राजमहल तक सीमित रहता था। अब यह जन-उत्सव बन चुका है, जिसमें स्थानीय लोग और पर्यटक बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। फाग मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह उत्सव धार्मिक भक्ति, लोक नृत्य, संगीत और आस्था का अनुभव कराता है।
