एआरबी टाइम्स ब्यूरो, हिमाचल प्रदेश
शिमला, किन्नौर और कुल्लू जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई ताज़ा बर्फबारी से पूरे हिमाचल प्रदेश में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। जहां एक ओर तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर इस बर्फबारी ने सेब सहित अन्य नकदी फसलों पर निर्भर बागवानों के चेहरे खिला दिए हैं। लंबे समय से पर्याप्त बर्फबारी न होने के कारण बागवानी सीजन को लेकर चिंता बनी हुई थी, लेकिन अब इस हिमपात से फसलों के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर पूरे होने की उम्मीद जगी है।

शिमला जिले के कुफरी, नारकंडा, खड़ापत्थर, रोहड़ू और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में अच्छी बर्फबारी हुई है। किन्नौर जिले के कल्पा, सांगला, छितकुल और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। कुल्लू जिले में रोहतांग दर्रा, सोलंग घाटी, जलोड़ी दर्रा और अन्य ऊपरी क्षेत्रों में भारी हिमपात दर्ज किया गया। बर्फबारी से जहां पहाड़ों की खूबसूरती बढ़ी है, वहीं आम जनजीवन पर इसका असर भी साफ नजर आ रहा है।

लगातार हो रही बर्फबारी के चलते राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कई स्थानीय संपर्क मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। मनाली–लेह राष्ट्रीय राजमार्ग, शिमला–रोहड़ू मार्ग और किन्नौर को जोड़ने वाले कई प्रमुख सड़क मार्ग बंद कर दिए गए हैं। फिसलन बढ़ने के कारण वाहनों के फंसने और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़कों को बहाल करने का काम जारी है, हालांकि लगातार बर्फ गिरने से कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।
बर्फबारी का असर बिजली और पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ा है। कई क्षेत्रों में बिजली की लाइनें बाधित हुई हैं और पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासन ने आपात सेवाओं को अलर्ट पर रखा है और हालात पर नजर बनाए हुए है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
