एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रोहड़ू
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष अजय नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के विभिन्न वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) आधार पर कार्यरत 781 प्रवक्ता पिछले 13–15 वर्षों से दूरदराज एवं दुर्गम क्षेत्रों में पूर्ण निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब शिक्षा विभाग में रिक्तियां अपने चरम पर थीं और शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना बड़ी चुनौती थी, तब इन शिक्षकों ने विभाग का मजबूती से साथ निभाया और शिक्षा व्यवस्था को संभाले रखा।
एलडीआर नीति में शामिल कर बोर्ड के माध्यम से परीक्षा की मांग
संघ ने मांग की है कि जिस प्रकार सीएंडवी और टीजीटी शिक्षकों के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाए गए हैं तथा 22 फरवरी 2026 को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला द्वारा परीक्षा आयोजित की गई, उसी प्रकार 781 एसएमसी प्रवक्ताओं को भी एलडीआर (लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) नीति में शीघ्र शामिल किया जाए।
संघ का कहना है कि उनके लिए भी स्पष्ट, पारदर्शी और न्यायसंगत भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाकर धर्मशाला बोर्ड के माध्यम से परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए, ताकि उन्हें समान अवसर मिल सके।
सीबीएसई में परिवर्तित विद्यालयों से भविष्य पर संकट
संघ ने यह भी चिंता जताई कि प्रदेश के कई विद्यालयों को सीबीएसई में परिवर्तित किए जाने से इन अनुभवी शिक्षकों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। केवल बोर्ड परिवर्तन या तकनीकी आधार पर उन्हें प्रस्तावित सीबीएसई कैडर परीक्षा से वंचित करना उनके अनुभव और योगदान के साथ अन्याय होगा।
संघ के अनुसार, यह प्रशासनिक निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विपरीत है।
संघ की प्रमुख मांगें
एसएमसी आधार पर कार्यरत प्रवक्ताओं की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सीबीएसई में परिवर्तित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को पदों से विस्थापित न किया जाए।
नियमितीकरण नीति बनने तक सभी एसएमसी शिक्षकों को सेवा में बनाए रखा जाए।
यदि सीबीएसई कैडर के तहत अलग परीक्षा आयोजित की जाती है, तो एसएमसी प्रवक्ताओं को भी उसमें बैठने का अवसर दिया जाए।
उनकी लंबी सेवा अवधि और अनुभव का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाए।
सरकार से संवेदनशील निर्णय की अपील
अजय नेगी ने कहा कि इन शिक्षकों ने कठिन परिस्थितियों में विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में विभाग का दायित्व बनता है कि उनके अनुभव, सेवा अवधि और योगदान को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील, न्यायपूर्ण और सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि उपरोक्त मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र ठोस निर्णय लिया जाए।
