एआरबी टाइम्स ब्यूरो, नाहन
हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. परमार का गृह जिला सिरमौर अपनी संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। अब यह जिला अपनी अनोखी शादियों के लिए भी चर्चा में है। जुलाई 2025 में जब दो भाइयों ने एक ही लड़की से विवाह किया था, तब गिरिपार क्षेत्र की यह शादी देश-दुनिया में चर्चा का विषय बनी थी। अब एक बार फिर सिरमौर जिले के शिलाई विधानसभा क्षेत्र में दो भाइयों ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने समाज को नई सोच दी है।
🟩 संविधान को साक्षी मानकर ली वैवाहिक शपथ
सिरमौर जिले के कलोग गांव के दो सगे भाई सुनील कुमार और विनोद कुमार ने अपनी शादी में धार्मिक कर्मकांडों की बजाय संविधान को साक्षी माना। दोनों ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर यह अनोखा निर्णय लिया। न सात फेरे, न मंत्रोच्चार बल्कि संविधान की शपथ लेकर जीवनभर साथ निभाने का वचन लिया। शादी समारोह में दोनों भाइयों ने अपने जीवनसाथी के साथ यह संकल्प दोहराया कि वे समानता, सम्मान और मानवता के मूल्यों पर आधारित जीवन व्यतीत करेंगे।

🟦 हटके कार्ड और प्रेरणादायक संदेश
आम तौर पर लोग शादी के कार्ड पर अपने देवी-देवताओं की तस्वीरें छपवाते हैं, लेकिन इन दोनों भाइयों ने अपनी शादी के कार्ड पर महान विभूतियों के चित्र प्रकाशित करवाए। वे विभूतियां जिन्होंने समाज से अंधविश्वास और कुरीतियों को मिटाने में योगदान दिया। कार्ड पर डॉ. आंबेडकर, महात्मा बुद्ध जैसे समाज सुधारकों की छवियां छपीं। इस पहल को गांव और जिलेभर में सराहना मिल रही है।
🟧 परंपराओं का सम्मान भी बरकरार
हालांकि विवाह संविधान की शपथ से हुआ, लेकिन भाइयों ने स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए कुछ पारंपरिक रस्में भी निभाईं।
25 अक्तूबर की शाम को मामा स्वागत हुआ और 26 अक्तूबर को सुबह बरात निकली। बरात गांव से दुल्हनों के घर पहुंची, जहां संविधान की शपथ ग्रहण कर विवाह संपन्न हुआ। गांव के लोग बड़ी संख्या में समारोह में शामिल हुए और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। दोनों भाइयों की यह सोच और पहल सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इस अनोखे विवाह में दुल्हन पक्ष ने भी पूर्ण सहयोग और समर्थन दिया। सुनील कुमार बौद्ध ने शिलाई के कटाड़ी गांव की रितु से विवाह किया, जबकि विनोद कुमार रीना वर्मा के साथ परिणय सूत्र में बंधे। दोनों दूल्हे सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं और समाज में जागरूकता फैलाने के कामों में सक्रिय रहते हैं।
🟨 जुलाई में हुई थी दो भाइयों से एक दुल्हन की शादी
इसी साल जुलाई 2025 में सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के शिलाई गांव में भी एक अनोखी शादी हुई थी। यहां की सुनीता चौहान ने दो सगे भाइयों प्रदीप और कपिल से एक साथ विवाह किया था। विवाह पूरी सहमति और सामुदायिक भागीदारी से सम्पन्न हुआ था। यह उदाहरण भी चर्चा में रहा और उस समय देशभर के मीडिया ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
🟫 समाज के लिए नई दिशा
कलोग गांव की यह शादी बताती है कि समाज बदल रहा है। जहां पहले परंपराओं से हटकर कुछ करना असंभव माना जाता था, वहीं अब शिक्षित युवा संविधान और समानता के मूल्यों को अपनाते हुए सामाजिक बदलाव की राह दिखा रहे हैं। डॉ. आंबेडकर के विचारों से प्रेरित यह विवाह न केवल एक अनोखी पहल है, बल्कि समाज सुधार और तर्कशील सोच की मिसाल भी बन गया है। लोगों ने इस पहल को सकारात्मक संदेश बताया। उनका कहना है कि यह विवाह आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाएगा कि शादी केवल रस्मों का नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और समानता के रिश्ते का प्रतीक है।
