एआरबी टाइम्स ब्यूरो | कुमारसैन
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड विद्युत पेंशनर फोरम की कोटगढ़-खनेटी इकाई की बैठक आर. डी. सरकैक की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में इकाई के सभी सदस्यों ने भाग लिया। बैठक शुरू होने से पहले फोरम के सदस्य शिव दयाल के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इसके बाद इकाई के प्रधान सुंदर सिंह कंवर ने कहा कि राज्य विद्युत बोर्ड के प्रबंधक वर्ग द्वारा पेंशनरों के वित्तीय लाभ जैसे ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट तथा 2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों के संशोधित वेतन के वित्तीय लाभ पिछले तीन वर्षों से लंबित रखे गए हैं। उन्होंने इसे पेंशनरों के प्रति प्रबंधन का नकारात्मक रवैया बताया। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार विलंब जारी रहा तो पेंशनरों को मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। कई पेंशनर अपने वित्तीय लाभ न मिलने के कारण अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं और कुछ के लिए तो अपने बच्चों की शादी जैसे जरूरी कार्य करना भी मुश्किल हो रहा है।
बैठक को संबोधित करते हुए विनोद कुमार ने कहा कि आज संसद में बिजली संशोधन विधेयक 2025 लाया जा रहा है, जिसका फोरम कड़े शब्दों में विरोध करता है। उन्होंने कहा कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर आगे भी इस बिल का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से बिजली बोर्डों को निजी कंपनियों को सौंपने का प्रयास किया जा रहा है। प्रस्तावित बिल में बिजली वितरण का कार्य अलग-अलग कंपनियों को देने का प्रावधान है। इसी के मद्देनज़र उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न कंपनियों द्वारा आपूर्ति की गई बिजली की अलग-अलग गणना की जा सकती है।
फोरम का मानना है कि ये मीटर कंपनियों के हितों को ध्यान में रखकर लगाए जा रहे हैं और इससे उपभोक्ताओं की क्रॉस सब्सिडी समाप्त हो सकती है, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली दरों में वृद्धि होने की आशंका है। इसलिए फोरम ने सरकार से मांग की कि बिजली संशोधन विधेयक 2025 को तुरंत वापस लिया जाए और स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को रोका जाए।
