एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
राज्य सरकार की ओर से विजिलेंस को RTI से बाहर करने फैसले पर हिमाचल प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस निर्णय पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे जनविरोधी और पारदर्शिता के खिलाफ बताया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि विजिलेंस को RTI से बाहर करने का फैसला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया है, लेकिन विपक्ष इस तर्क को सिरे से खारिज करता है। उनके अनुसार विजिलेंस का गठन भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। ऐसे में विजिलेंस को RTI से बाहर करना विभाग की मूल भावना को कमजोर करता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि RTI कानून 2005 की धारा 24 के अनुसार सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भी भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में सूचना देनी होती है। उनका आरोप है कि सरकार एक प्रशासनिक आदेश के जरिए जांच एजेंसियों को सूचना देने से रोकने की कोशिश कर रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। विजिलेंस को RTI से बाहर करने का फैसला तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
एंट्री टैक्स बढ़ोतरी पर भी जताई आपत्ति
उन्होंने राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले को भी अदूरदर्शी बताया। उनका कहना है कि इस कदम के जवाब में पड़ोसी राज्य भी हिमाचल के वाहनों पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने सीमावर्ती जिलों ऊना, कांगड़ा, चंबा, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर के लोगों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों के निवासियों का रोजमर्रा का आना-जाना पंजाब और हरियाणा में रहता है।
ऐसे में बार-बार टैक्स देना उनके लिए परेशानी का कारण बनेगा।विपक्ष का कहना है कि एंट्री टैक्स बढ़ने से पड़ोसी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है, जिससे हिमाचल के पर्यटन कारोबार और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
