एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर सोमवार को शिमला स्थित पीटरहॉफ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसकी औपचारिक घोषणा की। देश में अब तक त्रिपुरा, मिजोरम और लक्षद्वीप को पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा मिला था। लेकिन अब हिमाचल प्रदेश 99.30% साक्षरता दर के साथ शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार, जब किसी राज्य की साक्षरता दर 95% या उससे अधिक हो जाती है, तब उसे पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जाता है। हिमाचल इस मानक से कहीं आगे निकल चुका है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता दर अभी 80.9% है।
अब 56,960 लोग निरक्षर बचे
हिमाचल की अनुमानित आबादी लगभग 75.27 लाख है। इनमें से अब केवल 56,960 लोग निरक्षर बचे हैं। सरकार ने इन्हें साक्षर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की योजना बनाई है। 2011 की जनगणना में हिमाचल की साक्षरता दर 82.80% थी, लेकिन पिछले एक दशक में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, किसी व्यक्ति को तभी साक्षर माना जाता है जब वह साधारण शब्द पढ़ और लिख सके, तथा बुनियादी गणितीय गणनाएं कर पाए।
हिमाचल की साक्षरता उपलब्धियां
कुल अनुमानित जनसंख्या: 75.27 लाख
निरक्षर बचे हुए लोग: 56,960
साक्षरता दर: 99.30% (2011 की 82.80% से बड़ी छलांग)
प्रमुख अभियान:
उल्लास योजना (2023-25) – 43,885 लोग साक्षर हुए
पढ़ना-लिखना अभियान (2022) – 1 लाख लोग साक्षर
साक्षर भारत योजना (2017) – 67,500 लोग साक्षर
अन्य राज्यों से तुलना (Literacy Rate 2025)
हिमाचल प्रदेश – 99.30%
मिजोरम – 98.2%
लक्षद्वीप – 97.3%
त्रिपुरा – 95.6%
केरल – 95.3%
गोवा – 93.6%
मुख्यमंत्री ने कहा – आज का दिन हिमाचल के लिए ऐतिहासिक है। यह उपलब्धि न केवल राज्य बल्कि केंद्र सरकार के 2030 तक पूर्ण साक्षर भारत लक्ष्य को भी गति देगी।” उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए मैं, छात्रों समेत शिक्षकों को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में और मजबूती लाई जाएगी और शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार किया जाएगा।
