एआरबी टाइम्स ब्यूरो
शिमला। एसएफआई शिमला जिला इकाई ने नामांकित छात्र केंद्रीय संघ (SCA) के खिलाफ और छात्र संघ चुनावों की बहाली के समर्थन में ज़ोरदार धरना प्रदर्शन किया। यह विरोध न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के छात्र समुदाय को प्रभावित कर रही समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया।
प्रदर्शन के दौरान शिमला जिला एसएफआई अध्यक्ष विवेक नेहरा ने कहा:
“नामांकित एससीए छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। यह व्यवस्था सरकार और प्रशासन की मिलीभगत से छात्रों की आवाज़ को दबाने का प्रयास है।”
उन्होंने मांग की कि छात्र संघ चुनावों को तुरंत बहाल किया जाए, जिससे छात्र अपने प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से चुन सकें।
प्रमुख मुद्दे जो प्रदर्शन में उठाए गए:
शिक्षा का निजीकरण और बढ़ती फीस
छात्रवृत्तियों में कटौती और समय पर वितरण न होना
हॉस्टल, पुस्तकालय, इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी
छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
प्रदेश की राजनीति में गिरावट और युवाओं की आवाज़ को दबाना
2013 के बाद से नहीं हुए छात्र संघ चुनाव
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2013 के बाद से छात्र संघ चुनाव आयोजित नहीं हुए हैं। इसके बाद लगातार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तानाशाही रवैया अपनाया गया, जिससे छात्रों की भागीदारी और समस्याओं को नजरअंदाज किया गया।
एसएफआई ने इस बात पर भी रोष जताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू सहित 58 विधायक छात्र राजनीति से निकल कर आए हैं, फिर भी विधानसभा में छात्र संघ चुनाव को लेकर कांग्रेस के रवैये को निंदनीय बताया गया।
छात्रों की मांगें और चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई शिमला जिला सचिव पवन ने कहा:
“छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करना, देश के भविष्य को खतरे में डालना है। नामांकित एससीए लोकतंत्र की हत्या है। अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि कई कॉलेजों में छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिल रही, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भारी परेशानी हो रही है।
एसएफआई का अगला कदम: राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन
एसएफआई ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक जागरूकता अभियान और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। संगठन ने सभी छात्रों और युवाओं से अपील की है कि वे इस आंदोलन का हिस्सा बनें और अपने अधिकारों की लड़ाई एकजुट होकर लड़ें।
