एआरबी टाइम्स ब्यूरो, बिलासपुर
हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने घोषणा की है कि घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के कसारू में 300 करोड़ रुपये की लागत से हिमाचल की पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है और निर्माण कार्य शीघ्र ही आरंभ किया जाएगा। धर्माणी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय युवाओं को विश्वस्तरीय, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा प्रदान करेगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, सेमीकंडक्टर तकनीक जैसे आधुनिक विषयों पर उद्योग-केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। वर्चुअल लैब्स और डिजिटल लर्निंग मोड से छात्र अपनी गति से सीख सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि यह घुमारवीं क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी मील का पत्थर साबित होगी।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार:
मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार अगले सत्र 2026-27 से 100 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने जा रही है। बिलासपुर जिले में छह स्कूलों को जोड़ा जाएगा, जिनमें भराड़ी, हटवाड़ और घुमारवीं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना के तहत सरकार विधवा, तलाकशुदा, निराश्रित और दिव्यांग माता-पिता के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च वहन कर रही है। पात्र छात्रों के आरडी खातों में 18 वर्ष तक प्रतिमाह ₹1000 जमा करवाया जाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार:
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक आदर्श अस्पताल स्थापित कर रही है, जहां 6 विशेषज्ञ चिकित्सक नियुक्त किए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
प्राकृतिक खेती की दिशा में अग्रणी हिमाचल:
मंत्री धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य की 3,584 पंचायतों के 2,22,893 किसान अब तक 38,437 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक एक लाख नए किसानों को इस पहल से जोड़ने का है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार किसानों को देश में सर्वाधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रदान कर रही है —
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मक्का: ₹40 प्रति किलो
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गेहूं: ₹60 प्रति किलो
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कच्ची हल्दी: ₹90 प्रति किलो
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पांगी क्षेत्र की जौ: ₹60 प्रति किलो
यह कदम हिमाचल को हरित, आत्मनिर्भर और सतत कृषि राज्य के रूप में स्थापित करेगा।
