एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में लेखा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह विभाग अपनी तथ्य-आधारित रिपोर्टों और वित्तीय सुझावों के माध्यम से लोक कल्याणकारी सुशासन की मजबूत आधारशिला रखता है। वे शिमला के एजी कार्यालय में आयोजित पांचवें लेखा सप्ताह (ऑडिट वीक 2025) के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। ऑडिट वीक का आयोजन भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग, राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी, प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) और प्रधान महालेखाकार (लेखांकन एवं अनुश्रवण) की ओर संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि लेखा विभाग लोकतंत्र का अनिवार्य स्तंभ है, जो जवाबदेही, सुशासन और सार्वजनिक संस्थानों में विधि हित सुनिश्चित करता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और विकासशील राज्य में भौगोलिक व पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए ऑडिट की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने विभाग में बढ़ते डिजिटलाइजेशन और मॉडर्न तकनीकों के उपयोग पर संतोष व्यक्त किया। राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल में ऑडिट कार्यालय ने डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल और हाइब्रिड मॉडल अपनाकर प्रक्रियाओं को अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी बनाया है।
कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में राष्ट्रीय लेखा परीक्षा एवं लेखा अकादमी (NAAA) शिमला के महानिदेशक एस आलोक ने बताया कि विभाग ने हाइब्रिड और रिमोट ऑडिट जैसे कदम उठाकर लेखा परीक्षा को आसान और पेपरलेस बनाया है। उन्होंने कहा कि ऑडिट का अर्थ केवल आपत्तियां उठाना नहीं, बल्कि सरकारी निधियों के पारदर्शी, जिम्मेदारीपूर्ण और लक्ष्य-आधारित व्यय को सुनिश्चित करना भी है। कार्यक्रम में प्रधान महालेखाकार पुरुषोत्तम तिवारी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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