एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
सीटू और हिमाचल किसान सभा ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर ऐतिहासिक किसान आंदोलन के पाँच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रामपुर और निरमंड में रैली निकालकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को कमजोर करने वाले चार लेबर कोडों, किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने, लगातार बढ़ती महंगाई-बेरोज़गारी और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना था।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मजदूरों, कर्मचारियों और किसानों की अनदेखी कर पूंजीपतियों के हित में नवउदारवादी नीतियां लागू कर रही है। प्रतिभागियों ने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर बढ़ते हमलों को लेकर भी चिंता जताई।
रामपुर में रैली को सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, सचिव नील दत्त शर्मा, मिलाप नेगी, किसान सभा जिला अध्यक्ष प्रेम चौहान, काम राज, राजपाल, सतीश, आशा, देविंदर, कृष्णा राणा और हरदयाल कपूर सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। वहीं निरमंड में किसान सभा जिला महासचिव देवकी नंद, उपाध्यक्ष रणजीत ठाकुर, कपिल ठाकुर, रेखा चौहान, सीटू ब्लॉक अध्यक्ष सुषमा, सचिव परमिंदर और परस राम ने अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों के संघर्ष से बने श्रम कानूनों को खत्म कर नवंबर 2025 से चार लेबर कोड जल्दबाज़ी में लागू कर दिए गए, जिनसे मजदूरों के सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल जैसे बुनियादी अधिकार कमजोर हो गए हैं। इनके लागू होने से अस्थिर रोजगार बढ़ेगा, वेतन घटेगा और सामाजिक सुरक्षा में भारी कमी आएगी। फिक्स-टर्म रोजगार को बढ़ावा मिलने से स्थायी नौकरियों का सपना टूटता जा रहा है, जबकि कंपनियों को हायर-एंड-फायर का अधिकार मिल गया है।
नेताओं ने काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे करने को मजदूरों पर अतिरिक्त बोझ बताया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि चारों लेबर कोड तुरंत वापस लिए जाएं, पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए और वैज्ञानिक संशोधनों के बाद ही कोई सुधार लागू हों। साथ ही 26,000 रुपये न्यूनतम वेतन, समान कार्य के लिए समान वेतन, मनरेगा में 200 दिन का रोजगार, निजीकरण पर रोक, महंगाई नियंत्रण और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने जैसी मांगें भी उठाई गईं। नेताओं ने स्पष्ट किया कि लेबर कोड और श्रम शक्ति नीति 2025 वापस न होने तक संघर्ष और तेज किया जाएगा।
