एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश में आगामी शैक्षणिक सत्र से प्री-नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाएगा। अध्यापक अपने मोबाइल फोन स्टाफ रूम या बैग में रख सकेंगे। इस निर्णय को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी। राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए नए सत्र से प्राथमिक स्कूलों में खेलकूद प्रतियोगिताएं शुरू करने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग में एक बेहतर और पारदर्शी तबादला नीति लागू करने की बात कही। साथ ही राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों और सीबीएसई पाठ्यक्रम आधारित स्कूलों के लिए विशेष कैडर गठित किया जाएगा।
स्कूली पाठ्यक्रम में संगीत-संस्कृति से जुड़े विषय होंगे शामिल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। स्कूली पाठ्यक्रम में संगीत, संस्कृति और भविष्य से जुड़े आधुनिक विषयों को शामिल किया जाएगा। शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर अस्थायी और स्थायी भर्तियां की जाएंगी। अस्थायी नियुक्तियां पांच वर्ष के लिए होंगी, जबकि स्थायी भर्तियां बैचवाइज और प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2032 तक प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूल विकसित किए जाएंगे।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने समग्र शिक्षा निदेशालय में नव-निर्मित विद्या समीक्षा केंद्र, शिक्षा दीर्घा, नए सम्मेलन कक्ष और आधुनिक केंद्रीय ताप व्यवस्था का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि ये सुविधाएं शिक्षा प्रशासन और डिजिटल शिक्षा प्रबंधन को और अधिक सशक्त बनाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते तीन वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा गुणवत्ता रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश ने 21वें स्थान से सुधार करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘संकल्प वर्कबुक’ का भी विमोचन किया।
शिक्षा में अभूतपूर्व प्रगति, साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत : रोहित ठाकुर
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है और प्रदेश की साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए क्लस्टर स्कूल प्रणाली लागू की गई है, जिससे पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और खेल संसाधनों का साझा उपयोग संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में भी हिमाचल का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। मेधावी छात्रों के लिए जेईई और नीट की निःशुल्क कोचिंग सुविधा सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी समान अवसर मिल रहा है।
