एआरबी टाइम्स ब्यूरो | शिमला
Himachal Panchayat Election : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को समय पर करवाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद शुक्रवार सुबह अपना अंतिम फैसला सुना दिया। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले हर हाल में कराए जाएं। हाईकोर्ट ने पंचायतीराज विभाग, राज्य निर्वाचन आयोग और प्रदेश सरकार को आपसी समन्वय से बैठक कर ठोस रणनीति तैयार करने के भी आदेश दिए हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की जड़ हैं और इन्हें अनिश्चितकाल तक स्थगित रखना संविधान की भावना के खिलाफ है। यह फैसला न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सुनाया।
20 फरवरी से शुरू होगी चुनाव प्रक्रिया
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, पंचायत चुनाव प्रक्रिया 20 फरवरी 2026 से शुरू होगी। 30 अप्रैल 2026 तक मतदान पूरा किया जाएगा चुनाव में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं होगी। गौरतलब है कि इस मामले में 7 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि नई पंचायतों और परिसीमाओं के गठन की प्रक्रिया जारी है। आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद भी चुनाव में कम से कम 90 दिन लगेंगे। फरवरी–मार्च में परीक्षाएं और मई के बाद जनगणना कार्य बाधा बन सकते हैं। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने भारी बारिश और कर्मचारियों की व्यस्तता को चुनाव में चुनौती बताया।
याचिकाकर्ता ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि सरकार जानबूझकर पंचायत चुनाव में देरी कर रही है। परिसीमन के लिए सरकार के पास एक साल से अधिक समय था। चुनाव पुरानी परिसीमाओं और जनगणना के आधार पर कराए जाएं। उन्होंने इसे संवैधानिक बाध्यता बताते हुए तत्काल चुनाव कराने की मांग की। सभी दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट आदेश जारी कर दिए। यह फैसला न केवल पंचायत स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि प्रदेश सरकार और निर्वाचन आयोग के लिए भी यह संदेश देगा कि संवैधानिक चुनावों में देरी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगी।
