एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए दो आधुनिक और प्रभावी तकनीकों—सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिनस मैकाडम (सीजीबीएम) और स्टेबलाइज्ड बेस लेयर तकनीक—का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसकी शुरुआत शोघी–मेहली सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों से की गई है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग प्रदेश में लगभग 35 हजार किलोमीटर सड़कों का रखरखाव करता है और सड़क गुणवत्ता सुधारने तथा हर मौसम में यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि खराब मौसम और जलभराव के कारण राज्य की करीब 20 प्रतिशत सड़कें बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे बार-बार मरम्मत करनी पड़ती है और रखरखाव लागत बढ़ जाती है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई, टिकाऊ और आधुनिक सड़क निर्माण तकनीकों को दीर्घकालीन उपाय के रूप में अपनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) के साथ विचार-विमर्श के बाद शोघी–दृमेहली सड़क पर इन तकनीकों के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इन तकनीकों से बनी सड़कें अधिक मजबूत होंगी, भारी यातायात को सहन करने में सक्षम होंगी तथा पानी से होने वाले नुकसान से बेहतर तरीके से सुरक्षित रहेंगी। इससे बार-बार मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
मंत्री ने कहा कि इन तकनीकों से तैयार सड़कें करीब 10 वर्षों तक टिकाऊ रहने की उम्मीद है, जिससे रखरखाव खर्च में कमी आएगी और लोगों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा सुविधा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि ये तकनीकें देश के कई राज्यों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), अन्य सरकारी योजनाओं तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा पहले से ही सफलतापूर्वक अपनाई जा रही हैं।
इस अवसर पर शोघी–मेहली सड़क पर नई तकनीकों से किए जा रहे कार्यों की प्रगति पर एक प्रस्तुति भी दी गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्ष 2026-27 की वार्षिक रखरखाव योजना के तहत एक समिति गठित कर उन सड़कों की पहचान की जाए, जहां इन आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।
