एआरबी टाइम्स ब्यूरो | धर्मशाला
हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज (धर्मशाला) से एक संवेदनशील सुरक्षा मामला सामने आया है, जहां हिमाचल प्रदेश पुलिस ने एक चीनी नागरिक को हिरासत में लिया है। आरोपी पर बिना वैध भारतीय वीजा के लंबे समय तक भारत में ठहरने का आरोप है। इस संबंध में मैक्लोडगंज पुलिस थाने में विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। साथ ही पुलिस उसकी गतिविधियों की गहन जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मामला केवल वीजा उल्लंघन का है या किसी संभावित जासूसी गतिविधि से भी जुड़ा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस को किसी ने विदेशी नागरिक की संदिग्ध मौजूदगी की सूचना दी थी, जिसके बाद उसे कार्यालय लाया गया और पूछताछ शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में वह केवल चीनी भाषा में ही बातचीत करता पाया गया और उसके पास तत्काल कोई वैध भारतीय दस्तावेज नहीं मिले। वह न हिंदी बोल सका और न ही अंग्रेजी में संवाद कर पाया। बाद में उसने अपना पासपोर्ट प्रस्तुत किया।पासपोर्ट विवरण के अनुसार आरोपी का नाम लौ वेननियन है और उसकी जन्मतिथि 10 मई 1965 दर्ज है। उसका जन्म स्थान सिचुआन (चीन) और पासपोर्ट जारी स्थान युन्नान दर्ज किया गया है। उसके पास नेपाल सरकार की ओर से जारी एक पर्यटक वीजा मिला, जिसकी अवधि 29 जून 2025 से 26 सितंबर 2026 तक अंकित थी, जिसमें 90 दिन का प्रवास उल्लेखित है। वह करीब पांच महीने से कांगड़ा जिले के मैक्लोडगंज क्षेत्र में बिना किसी वैध भारतीय वीजा के ठहरा रहा।
जांच के दौरान उसके बैंक खाते में करीब चार लाख चीनी युआन की राशि होने का भी पता चला है। उसके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वह पिछले करीब पांच महीनों से मैक्लोडगंज के समीप एक गांव में किराये के मकान में किस उद्देश्य से रह रहा था। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वह चीन की पुलिस सेवा में काम कर चुका है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मैक्लोडगंज तिब्बती धर्मगुरु 14वें दलाई लामा का निवास स्थान है और निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्यालय भी यहीं स्थित है। धर्मशाला में आईबी सहित कई केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्यालय मौजूद हैं। इसके बावजूद इतने लंबे समय तक एक चीनी नागरिक की मौजूदगी का संज्ञान न लिया जाना कई सवाल खड़े करता है। उल्लेखनीय है कि दलाई लामा को पहले भी चीन की ओर से धमकियां मिलती रही हैं। ऐसे में यह पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और विभिन्न एजेंसियां मिलकर इसकी जांच में जुटी हैं।
