एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश में वन भूमि पर जीवन यापन करने वाले लोगों को प्रदेश सरकार बड़ी राहत देने की तैयारी में है। सरकार इन परिवारों के लिए विशेष नीति बनाने जा रही है, जिसे अंतिम रूप देकर जल्द ही केंद्र सरकार को प्रस्ताव के रूप में भेजा जाएगा। राज्य सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वन भूमि पर जीवन निर्वाह करने वालों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का आदेश सकारात्मक है और इससे प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार सक्रिय
नेगी ने बताया कि वन भूमि से जुड़े कई हाई कोर्ट के आदेशों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। ऐसे में यदि आदेशों के बावजूद नोटिस जारी किए जा रहे हैं तो यह गलत है और इस पर कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ जैसी आपदाओं में जब लोगों की जमीन बह गई और आवास के लिए स्थान नहीं बचा, तब सरकार ने विधानसभा के माध्यम से नीति बनाने का निर्णय लिया। वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत राहत प्रदान करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव पहले भी भेजा गया है और अब एक व्यापक नीति बनाकर दोबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा।
केंद्र को शीघ्र भेजा जाएगा प्रस्ताव
राजस्व मंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही नीति का प्रारूप तैयार करेगी। इस नीति का उद्देश्य वन भूमि पर निर्भर परिवारों को कानूनी और मानवीय आधार पर राहत प्रदान करना है।
हिमाचल सदन मामले पर प्रतिक्रिया
दिल्ली स्थित हिमाचल सदन में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए नेगी ने कहा कि बिना अनुमति इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि वहां मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री ठहरे हुए थे और पुलिस को कानून के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए।
राज्यसभा चुनाव पर बयान
राज्यसभा चुनाव को लेकर पूछे सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि संख्या बल हमारे हक में है। चालीस लोग हमारे पास हैं, जबकि विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है और उन्हें इस तरफ सोचना भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस विपक्ष में थी और संख्या बल नहीं था, तो हमने कैंडीडेट भी खड़ा नहीं किया। राजस्व मंत्री नेगी ने कहा कि हम अनैतिक तरीके से जीतना नहीं चाहते और न जिताना चाहते।
