Shimla Drug Case : राजधानी शिमला में करीब एक करोड़ के एलएसडी नशे की तस्करी का मामला अब और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। जांच के दौरान नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई है।
इस हाई-प्रोफाइल केस में अब राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के कुछ कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने STF के चार पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें दो हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इन कर्मियों की भूमिका महज लापरवाही की थी या वे किसी स्तर पर इस ड्रग नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इस पहलू की गहन जांच की जा रही है।
Shimla Drug Case की जांच में यह भी सामने आया है कि शिमला में एक करोड़ के एलएसडी नशे के साथ पकड़े गए संदीप शर्मा और प्रिया पहले इस नशे को बचने के लिए कुल्लू गए थे। संयोग से उसी दौरान निलंबित किए गए STF कर्मियों की तैनाती भी कुल्लू में थी, जिससे शक और गहरा गया है। इसके बाद आरोपी शिमला पहुंचे और बीसीएस क्षेत्र में शिमला पुलिस के हत्थे चढ़ गए। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने हरियाणा के गुरुग्राम से मुख्य सप्लायर केरल निवासी नविएल हैरिसन को भी गिरफ्तार किया था।
जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और इसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस और सीआईडी Shimla Drug Case की हर एंगल से जांच कर रही हैं। विशेष रूप से STF कर्मियों की भूमिका को लेकर आंतरिक जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह मामला लापरवाही का है या किसी बड़े ड्रग रैकेट से मिलीभगत का। यह मामला न केवल पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि हिमाचल में बढ़ते नशे के खतरे को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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