एआरबी टाइम्स ब्यूरो | रामपुर बुशहर
उपमंडल रामपुर के शिंगला में भगवान परशुराम जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाई गई। रामपुर क्षेत्र में भगवान परशुराम द्वारा स्थापित चार ठहरियों में हर वर्ष इस पर्व को मनाने की परंपरा रही है।
रविवार को कनिष्ठ ठहरी शिंगला में आयोजित कार्यक्रम में चारों देवताओं की मौजूदगी में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान भगवान परशुराम के रथ की भव्य शोभा यात्रा और देवताओं का आगमन मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में इस ऐतिहासिक देव मिलन के साक्षी बने।
कार्यक्रम का आयोजन देवता साहिब यज्ञेश्वर मंदिर, शिंगला में किया गया। इसकी शुरुआत देवताओं के आगमन और विधि-विधान के साथ हुई। मंदिर समिति द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शोभा यात्रा निकाली गई।
यह परंपरा तीन वर्ष पूर्व ज्येष्ठ ठहरी जाहरू नाग मंदिर, शनेरी से शुरू हुई थी। इसके बाद हर वर्ष अलग-अलग ठहरियों में इस आयोजन को किया जा रहा है और इस बार शिंगला को इसका सौभाग्य मिला।
दिनभर चले इस धार्मिक आयोजन में भजन-कीर्तन और देव धुनों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने देवताओं के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर ग्रामीणों ने नाटी नृत्य प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग भी बिखेरे।
नोग घोड़ी चार ठहरी देव समिति के प्रधान बहादुर लाल शर्मा ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष बारी-बारी से चारों ठहरियों में किया जाता है, जिसमें सभी ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिलता है। इस अवसर पर आसपास के क्षेत्रों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे।
ब्राह्मण समाज रामपुर के अध्यक्ष राम रतन शर्मा ने बताया कि भगवान परशुराम जी की जयंती उनकी शयन स्थली ग्राम शिंगला में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सभी ब्राह्मणों ने एक स्वर में भगवान परशुराम के पदचिह्नों पर चलने और समाज में सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर दुराचारियों का अत्याचार बढ़ा, तब भगवान परशुराम ने 21 बार उनका विनाश कर धर्म की स्थापना की और अंत में पृथ्वी का दान कर मानवता को आदर्श संदेश दिया।
