एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
अडानी एग्री फ्रेश वर्कर्स यूनियन, संबद्ध सीटू ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोडों के खिलाफ गेट मीटिंग कर प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, यूनियन सचिव सुनील, कपिल और संजीव भगेट ने कहा कि वेतन कोड 2019, औद्योगिक संबंध कोड 2020, सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-दशा कोड 2020 श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुरक्षा को कमजोर करते हैं।
नेताओं ने आरोप लगाया कि इन कोडों के लागू होने से संगठित और असंगठित—दोनों ही क्षेत्रों में ठेका, कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी रोजगार का दबाव बढ़ेगा तथा ट्रेड यूनियन गतिविधियां बाधित होंगी। उन्होंने कहा कि 29 पुराने श्रम कानूनों को निरस्त कर नए कोड एकतरफा लागू किए गए हैं, जबकि मजदूर संगठनों की आपत्तियों को नज़रअंदाज़ किया गया है।
वेतन कोड में ‘कर्मी’ की परिभाषा ऐसी बनाई गई है कि असंगठित, घरेलू और प्लेटफॉर्म मजदूरों को न्यूनतम वेतन और समान मजदूरी के अधिकार से वंचित होने का खतरा है। औद्योगिक संबंध कोड में हड़ताल से पहले 14 दिन की पूर्व सूचना तथा सुलह/ट्रिब्यूनल प्रक्रिया के दौरान हड़ताल पर रोक जैसी शर्तें संविधान प्रदत्त अधिकारों को प्रभावित करती हैं। साथ ही 300 तक श्रमिक रखने वाली इकाइयों को बिना अनुमति छंटनी या बंद करने का अधिकार देना स्थाई रोजगार सुरक्षा पर सीधा हमला बताया गया।
सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 को लेकर यूनियन नेताओं ने कहा कि इसमें असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म मजदूरों की सुरक्षा स्पष्ट नहीं है, वहीं PF-ग्रेच्युटी को आधार एवं सरकारी अधिसूचनाओं से जोड़कर प्रक्रिया को और जटिल बना दिया गया है। व्यावसायिक सुरक्षा कोड में निरीक्षण व्यवस्था कमजोर होने से दुर्घटनाओं के बढ़ने की आशंका जताई गई।
नेताओं ने चारों लेबर कोडों और श्रम शक्ति नीति 2025 के ड्राफ्ट को तुरंत वापस लेने की मांग की। साथ ही 26 नवंबर 2025 को रामपुर में व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा करते हुए कहा कि मजदूरों का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
