एआरबी टाइम्स ब्यूरो, रामपुर बुशहर
सीटू क्षेत्रीय समन्वय समिति रामपुर ने सीटू राज्य कमेटी के आह्वान पर लेबर ऑफिस रामपुर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों को गुलाम बनाने वाले चार लेबर कोड और ग्रामीण मजदूरों के रोजगार की गारंटी देने वाले मनरेगा कानून को समाप्त करने के उद्देश्य से लाए गए वीबी–जी–राम–जी विधेयक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई तथा विधेयक की प्रतियां जलाई गईं।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, दिनेश मेहता, नीलदत शर्मा, सुरेंद्र ठाकुर और मिलाप नेगी ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को चार मजदूर विरोधी लेबर कोड लागू करने की अधिसूचना जारी कर मोदी सरकार ने देश के मजदूरों के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कोडों से मालिकों को मनमानी छूट दी गई है, जिससे संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूरों का शोषण बढ़ेगा।
नेताओं ने कहा कि मनरेगा कानून को कमजोर करने के लिए लाया गया वीबी–जी–राम–जी विधेयक ग्रामीण रोजगार पर सीधा हमला है। इससे ग्रामीण मजदूरों की रोजगार गारंटी समाप्त होकर किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि चारों लेबर कोड मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों, वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करते हैं। औद्योगिक संबंध कोड के तहत हड़ताल के अधिकार को लगभग निष्प्रभावी बना दिया गया है, जबकि 300 तक मजदूर रखने वाले प्रतिष्ठानों को बिना अनुमति छंटनी और बंदी की छूट देकर स्थायी रोजगार को खतरे में डाला गया है।
सामाजिक सुरक्षा कोड को भी कागजी करार देते हुए वक्ताओं ने कहा कि असंगठित, प्रवासी, गिग और प्लेटफॉर्म मजदूरों के लिए वास्तविक सुरक्षा की कोई ठोस गारंटी नहीं है। वहीं व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति कोड निरीक्षण व्यवस्था को कमजोर कर मजदूरों की जान जोखिम में डाल रहा है।
सीटू नेताओं ने मांग की कि चारों लेबर कोड और वीबी–जी–राम–जी विधेयक को तुरंत वापस लिया जाए, पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए और मजदूर संगठनों से व्यापक चर्चा के बाद ही किसी भी प्रकार का श्रम सुधार लागू किया जाए।
