एआरबी टाइम्स ब्यूरो
शिमला/कांगडा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद उन्होंने कांगड़ा हवाई अड्डे पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए आपदा की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सीमित संसाधनों से प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान कर रही है, लेकिन हिमाचल को केंद्र से विशेष राहत पैकेज की तत्काल आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है, ऐसे में विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए वन संरक्षण अधिनियम में छूट दी जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से दो प्रतिशत अतिरिक्त उधार सीमा की अनुमति देने और क्षतिग्रस्त परियोजनाओं के पुनर्निर्माण हेतु सहायता बढ़ाने की मांग की।
उन्होंने बताया कि आपदा के कारण जल विद्युत परियोजनाएं महीनों तक बंद रहती हैं, जबकि वर्तमान फ्रेमवर्क में ऐसी क्षति का आकलन नहीं किया जाता। मुख्यमंत्री ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आपदा राहत मानकों में संशोधन की मांग की।
बैठक में मुख्यमंत्री ने जलविद्युत उत्पादन पर मुफ्त रॉयल्टी, 40 साल पूरे कर चुकी केंद्रीय उपक्रमों की बिजली परियोजनाओं को राज्य को हस्तांतरित करने, कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार, ऑल वेदर सुरंगों और वैकल्पिक पर्वतीय मार्गों के विकास के मुद्दे भी उठाए। इसके अलावा कुल्लू-मनाली मार्ग पर भुभुजोेत सुरंग परियोजना का मामला भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा गया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करने और प्रदेश के लिए बहुमूल्य समय देने हेतु प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। बैठक में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सांसद कंगना रणौत सहित कई मंत्री और अधिकारी उपस्थित रहे।
