एआरबी टाइम्स ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने कम विद्यार्थियों वाले 16 कॉलेजों को अब बंद न करने का फैसला लिया है। विद्यार्थियों के हित में लिए गए इस निर्णय के तहत अब इन कॉलेजों में प्रोफेशनल और रोजगार आधारित कोर्स शुरू किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों की संख्या बढ़ेगी और कॉलेजों को बंद करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इन कॉलेजों में कुकुमसेरी, टिक्कर, शिवनगर, चिंतपूर्णी, भलेई, कुपवी, रोनहाट, हरिपुर गुलेर, रामशहर, कोटली, पझोता, ननखड़ी, सुग भटोली, थाच, संधोल और जयनगर शामिल हैं। इन सभी कॉलेजों में छात्रों की संख्या 100 से कम है। फरवरी में शिक्षा विभाग ने इन्हें नजदीकी बड़े कॉलेजों में मर्ज करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अब सरकार ने इस योजना को रोक दिया है।
प्रोफेशनल और रोजगार आधारित कोर्स शुरू होंगे
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि इन कॉलेजों को आत्मनिर्भर और उपयोगी बनाने के लिए नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। इनमें चार वर्षीय बीएड, बीबीए, बीसीए, पर्यटन प्रबंधन, फार्मा, एग्रीकल्चर साइंस, आईटी और हेल्थ सेक्टर से जुड़े कोर्स शामिल किए जा सकते हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करें ताकि 2026 के अकादमिक सत्र से नए कोर्स शुरू किए जा सकें। प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भी भेजा जाएगा।
ग्रामीण कॉलेजों को मिलेगी नई पहचान
बैठक में यह भी कहा गया कि पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित छोटे कॉलेज स्थानीय युवाओं, खासकर लड़कियों की उच्च शिक्षा का प्रमुख माध्यम हैं। इन्हें मर्ज करने से छात्रों को शिक्षा से वंचित होना पड़ सकता था। इसलिए, अब कॉलेजों में स्थानीय मांग के अनुरूप नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षक भर्ती, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और डिजिटल शिक्षण साधनों को बढ़ाने के कदम उठाए जाएंगे। बैठक के दौरान स्कूल प्रिंसिपलों की पदोन्नति के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्मिक विभाग से समन्वय कर जल्द पदोन्नति सूची तैयार की जाए।
