शिमला (एआरबी टाइम्स ब्यूरो)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि न केवल अतिक्रमण करने वालों पर, बल्कि अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह इस मामले में दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करे और उन सभी अधिकारियों के नाम बताए, जो अतिक्रमण के समय संबंधित क्षेत्रों में तैनात थे और जिन्होंने उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी।
इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ कर रही है। अदालत ने राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वह उन अधिकारियों की पूरी जानकारी प्रस्तुत करें, जिनकी लापरवाही या अनदेखी के कारण अतिक्रमण हो सका। अदालत ने साफ किया कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की रिपोर्ट और अगली सुनवाई
सरकार की ओर से वन अधिकारी ठियोग और उपायुक्त शिमला द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को अदालत के समक्ष रखा गया। खंडपीठ ने इन दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
अतिक्रमण पर अदालत की सख्ती
अदालत ने यह भी कहा कि अब तक अतिक्रमण को रोकने और हटाने के लिए प्रशासन की ओर से पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। अदालत का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब न केवल अतिक्रमणकारियों पर बल्कि अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों पर भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कोटखाई तहसील का मामला
अदालत ने यह कार्रवाई शिमला जिले के कोटखाई तहसील के रतनाड़ी क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले पर की है। इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी वन भूमि पर कब्जा करने की शिकायतें सामने आई हैं। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया।इस मामले में अदालत ने संज्ञान एक पत्राचार के आधार पर लिया। शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में शिमला जिले के रतनाड़ी क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत की थी। उन्होंने अपने पत्र के साथ दस्तावेज और तस्वीरें भी संलग्न की थीं, जिनसे यह साफ हुआ कि अतिक्रमण गंभीर है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने इस मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज किया। अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, सचिव राजस्व, सचिव वन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन अधिकारी कोटखाई और पटवारी बागी रतनाड़ी को प्रतिवादी बनाया है। यह कदम इस बात को स्पष्ट करता है कि अदालत इस मामले को अत्यंत गंभीरता से देख रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
