एआरबी टाइम्स ब्यूरो, कुल्लू
कुल्लू में 28 नवंबर को होने वाले 35वें गीता जयंती समारोह में विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। गीता आश्रम के अनुयायी अभिनव वशिष्ट ने प्रेस वार्ता में बताया कि गीता कुटीर रामशिला में होने वाला यह वार्षिक आयोजन ब्रह्मलीन स्वामी आराधना “भिक्षु” की पावन स्मृति को समर्पित है। स्वामी आराधना, सद्गुरुदेव स्वामी गीतानंद “भिक्षु” की परम शिष्या थीं और उन्होंने अपना जीवन श्रीमद्भगवद्गीता के प्रचार-प्रसार में लगाया। इस वर्ष के आयोजन की प्रेरणा स्वामी मुक्तानंद “भिक्षु” और स्वामी किरण “भिक्षु” द्वारा प्रदान की गई है।
वशिष्ट ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को रचनात्मक माध्यमों से श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों से जोड़ना है। कार्यक्रम सुबह 9 बजे पंजीकरण के साथ प्रारंभ होगा, जिसके बाद नाश्ता और 10 बजे प्रतियोगिताओं की शुरुआत होगी। पेंटिंग प्रतियोगिता 10.30 बजे तथा भाषण प्रतियोगिता 11 बजे आयोजित की जाएगी। दोपहर 1 बजे भोजन और 2 बजे आशीर्वचन, संबोधन तथा पुरस्कार वितरण होगा।
कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता “श्रीकृष्ण–अर्जुन संवाद” विषय पर आधारित होगी। प्रतियोगिता की समयावधि 30 मिनट रहेगी। प्रथम पुरस्कार 2,101 रुपये, द्वितीय 1,501 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 1,001 रुपये निर्धारित किया गया है। रंग प्रतियोगियों को स्वयं लाने होंगे जबकि ड्राइंग शीट और आवश्यक सामग्री आश्रम की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी।
कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभागी श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों में से चुनिंदा श्लोक की व्याख्या करेंगे तथा उसके आधुनिक जीवन में महत्व पर प्रकाश डालेंगे। प्रत्येक प्रतिभागी को 5 मिनट का समय दिया जाएगा। विजेताओं को क्रमशः 3,100, 2,100 और 1,100 रुपये के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक विद्यालय पेंटिंग एवं भाषण प्रतियोगिता के लिए दो-दो विद्यार्थियों का नामांकन कर सकता है और उनके साथ एक अध्यापक का उपस्थित होना आवश्यक होगा। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र तथा विजेताओं को स्मृति-चिह्न और सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। आयोजन की सुचारू व्यवस्था के लिए कार्यक्रम से पूर्व एक व्हाट्सऐप समूह भी बनाया जाएगा।
अंत में वशिष्ट ने सभी विद्यालयों से आग्रह किया कि वे अपने विद्यार्थियों को समारोह में भाग लेने हेतु प्रेरित करें ताकि वे भगवद्गीता के अमर संदेश से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
